BLESSINGS
ॐ ह्रीं अर्हम् नमः
श्रीसद्गुरुभ्यो नमः
ॐ ऐं नमः
SHREE MATI GYANAY NAMAH
SHREE SHRUT GYANAY NAMAH
SHREE AVADHI GYANAY NAMAH
SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH
SHREE KEVAL GYANAY NAMAH
5 GYAN
Inspired by:
Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.
Shantinath Bhagwan – Part II
Learn & turn part – 2 story NO 24
१) शांतिनाथ भगवान की आत्मा रानी अचिरा के गर्भ में आई और गर्भ के प्रभाव के कारण अचिरा माता ने १४ महा स्वप्न देखे।
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२) एक बार हस्तिनापुर में एक खतरनाक महामारी फैली। सैकड़ों लोग मारे गए,
इसलिए लोगों ने विश्वसेन राजा से अनुरोध किया कि सभी प्रजा को इस आपदा से बचा लो।
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Shantinath Bhagwan – Part 2
Learn & turn part 2 story no 24
३) राजा ने रानी को बात बताई, रानी अचिरा ने "शांतिस्तोत्र" का उच्चारण किया और संकल्प कीया कि "यह महामारी समाप्त हो जाए"।
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४) गर्भ में रहे प्रभु के प्रभाव से जैसे ही विपत्ति समाप्त हुई, लोग खुश हो गए।
लोगों को राजा और रानी पर विशेष बहुमान प्रगट हुआ।
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५) रानी अचिरा ने एक पुत्र को जन्म दिया। देवो ने जन्म कल्याणक मनाया।
५६ दीक्कुमारीओने सूति कर्म किया, देव देवेन्द्रोने मेरु पर्वत पर जन्माभिषेक किया, राजा ने भी जन्म महोत्सव बनाया।
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६) शांतिकुमार जवान हो गए और लोगो की विनंती से विश्वसेन राजा ने उन्हें राजा बनाया।
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७) और कुछ दिनो के बाद आसपास के सभी राजा उनकी शरण में आए, बाद में उनके शस्त्रागार में "चक्ररत्न" प्रकट हुआ।
राजा शांति कुमार ने चक्र की पूजा की, इस तरह शांति कुमार अब चक्रवर्ती बने, लोगों को खुशी हुई।
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८) कुछ वर्षों के बाद, ९ लोकान्तिक देवो ने शांति कुमार से दीक्षा लेने का अनुरोध किया।
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९) अपने ज्ञान में दीक्षा का समय जानकर उन्होंने वरसीदान देने की शुरुआत की, १ साल बाद राजा शांतिकुमार ने दीक्षा ली।
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१०) साधना के बाद शांतिनाथ भगवान को "केवलज्ञान" प्राप्त हुआ।
देवो ने समवसरण बनाया, शांतिनाथ भगवान ने "देशना" दी, चतुर्विध संध की स्थापना की,
अमुक साल के बाद शांतिनाथ भगवान का समेतशिखर पर निर्वाण हुआ।
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