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हिन्दी-प्रस्तुति

  • दिनेश चंद्र त्रिवेदी
  • टी जी टी (हिन्दी)
  • जवाहर नवोदय विद्यालय
  • बालासोर, ओडिशा

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कक्षा-8पाठ -5 चिट्ठ्यों की अनूठी दुनियालेखक –अरविन्द कुमार सिंह �(11 जुलाई 1962)�स्थान-बरवारीपुर, सुल्तानपुर (उप्र)

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पाठ का सारांश

आज की विकसित दुनिया में संचार के अनेक माध्यम हैं जैसे व्हाट्सएप, ईमेल, एमएमएस, फिर भी पत्रों का अपना महत्त्व है । बिना पत्रों की मदद के हम अपने विचारों को अपने सुहृद जन तक आसानी से नहीं पहुंचा सकते। पत्रों के नाम भी भाषा के अनुसार अलग-अलग हैं जैसे – संस्कृत में पत्र ,उर्दू में खत, कन्नड में कागद, तेलुगु में उत्तरम और तमिल में कडिद कहा जाता है।

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पाठ का सारांश

लेखक मानते हैं कि 20 वीं सदी में पत्र मात्र संचार का माध्यम ही नहीं अपितु एक कला है दुनिया का शायद कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने कभी पत्र न लिखा हो। व्हाट्स एप ईमेल ,एमएमएस से सूचना मिटाई जा सकती है किंतु पत्रों को सहेज कर रखा जाता है । महात्मा गांधी के पास पूरी दुनिया से पत्र आते थे और वे उनका जवाब भी तुरंत लिखते थे ।

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पाठ का सारांश

भारत में प्रतिदिन चार करोड़ पत्र डाक में डाले जाते हैं । पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी पत्र के महत्व को माना है। कवि टैगोर और महात्मा गांधी के पत्र व्यवहार को कवि और महात्मा शीर्षक के नाम से प्रकाशित किया गया है । पर व्यवहार की परंपरा बहुत पुरानी है जो सदियों से चली आ रही है। संचार के जितने भी साधन विकसित हो जाएं परंतु पत्रों का अपना अलग महत्व हैटैगोर और महात्मा के पत्रों का संकलन आज भी महत्व पूर्ण है

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संचार के परंपरागत साधन� पोस्टकार्ड

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संचार के आधुनिक साधनों

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संचार के आधुनिक साधनों जैसे फोन एसएमएस आदि की तुलना में पत्रों का अत्यधिक महत्व है ।��राजनीति साहित्य कला के क्षेत्र में भी पत्रों द्वारा ही उथल –पुथल होना । ��मानव सभ्यता के विकास में पत्रों का महत्वपूर्ण स्थान है ।�पत्र को उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र कन्नड में कागद, तमिल में कड़ीद तथा तेलुगु में उत्तरम ।��

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पत्र अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है । �भारत में रोज साढ़े चार करोड़ पत्रों का डाक द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचना । ��पंडित नेहरू के पत्र इंदु के नाम भावनात्मक संबंधों की प्रगाढ़ता को दर्शाता है ।�� वर्षों पूर्व हरकारा, तेज घोड़े कबूतर फिर पहिया तत्पश्चात रेल अब टेलीफोन और मोबाईल तथा वायरलेस के माध्यम से तेजी से बदलाव । �

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विश्व डाक संघ द्वारा सोलह से कम उम्र बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिता वर्ष 1972 से शुरू की गई।�महात्मा गांधी के पत्र धरोहर के रूप में विद्यमान है ।�गांधी जी के पत्र दुनिया के कोने कोने से आते थे तथा गांधी जी उनका जवाब भी पूरी आत्मीयता के साथ लिखते थे ।�बच्चों समय निकाल कर रवींद्र नाथ टैगोर नेहरू के पत्र अवश्य पढ़ना चाहिए ।� रवींद्र नाथ टैगोर नेहरू और महात्मा गांधी के पत्र

व्यवहार को महात्मा और कवि नामक शीर्षक से

प्रकाशित किया गया ।

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बोध ग्रहण प्रश्न

  • 1. पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस क्यों नहीं दे सकते ? �2. संचार साधनों में भारी बदलाव किससे आया ?�3. विश्व डाक संघ ने पत्र लेखन की प्रतियोगिता कब से शुरू की ?�4. पत्र को कडिद किस भाषा में कहा जाता है ?

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5. पठित पाठ के लेखक का नाम बताएं ?�6. पाठ में दस्तावेज शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया ?�7. पुराने जमाने में किस पक्षी का प्रयोग पत्रवाहक के रूप में किया जाता था ?

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बहुविकल्पीय प्रश्न :-��1. किन लोगों के चूल्हे मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था से जलते हैं?�(क) देहाती लोगों के (ख) शहरी लोगों के�(ग) विदेशी लोगों के (घ) सभी लोगों के

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गृह कार्य :-

आप अपने मामा जी के घर गए हुए हैं। अधिक दिन होने के कारण आपकी माताजी का पत्र आपको मिलता है । उनके पत्र का जवाब देने के लिए पत्र लिखेंगे या फोन करेंगे। तर्क सहित उत्तर लिखिए।

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इतिश्री

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