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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

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Mahaveer Swami Bhav – 3-15 / Slide 9 - 18

Learn & turn part – 2 story NO 2

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Learn & turn part 2 Story no 2

Picture No. 1

१) भगवान का आत्माने तीसरे भव में भरत चक्रवर्ती के पुत्र मरीची के रूप में जन्म लिया, वहा सुख हि सुख था.

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Learn & turn part 2 Story no 2

Picture No. 2

२) आदिनाथ भगवान की देशना सुनके युवानी में वैराग्य हुआ और आदिनाथ भगवान के पास दिक्षा ली

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Picture No. 3

३) अमुक समय के बाद कष्टमय संयम के पालन में मुनि मरीचि को अशक्ति-अस्वस्थता महसूस हुई, मन दुखी दुखी ही रहा .

Learn & turn part 2 Story no 2

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Picture No. 4

४) अंतमे हारकर मुनि वेश छोडकर, त्रिदंडी का वेश धारण किया जिसमें त्रिदंड, छत्र, पेर में मोजडी, सुगंधी विलेपन, मुंडन, चोटी, जनोई, भगवा वस्त्र, स्नान करना इत्यादी सुविधा उन्होंने ली, फिर भी मुनियों के साथ में ही रहते थे.

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Learn & turn part 2 Story no 2

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Picture No. 5

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५) एक दिन भरत चक्री ने प्रभु से पूछा, इस समोसरण में कोई तीर्थकर का आत्मा है ?

प्रभु ने मरीचि का नाम बताया और साथ में यह भी कहा कि वे वासुदेव, चक्रवर्ती भी बनने वाले है, यह सुनकर भरत चक्रवती मरीचि के पास आये, भरत चक्री त्रिदंडी मरीचि को वंदन करते हैं और तीन पदवी की बात बताई.

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Picture No. 6

६) मुझे तीन पदवी मिलने वाली है, यह सुनकर मरीचि मदोन्मत-अतीव आनंदित हुए, ओर नृत्य करने लगे .

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Picture No. 7

७) एकबार कपिल नाम के राजकुमार को उपदेश दिया ओर वैरागी बनाया, कपिलने खुद (मरीचि) का शिष्य बनने का आग्रह किया.

मरीचि की भी इच्छा थी कि अगर मुझे एक शिष्य हो तो वह मेरी सेवा करेगा

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Picture No. 8

८) "जैन धर्मं तो सच्चा धर्म है ही, परंतु यह भी सच्चा धर्म है" यह बताकर उन्हें त्रिदंडी तापस बनाया और तापस जीवन पूर्ण किया.

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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Picture No. 9

९) बाद में प्रभु का आत्मा भव नं. ४.७,९,११,१३,१५ में देव लोक में उत्पन्न हुआ.

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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PICTURE NO. 10

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१०) भव नं ५,६,८,१०.१२.१४ में ब्राह्मण होकर त्रिदंडी तापस बने..

Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 3 to 15

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