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हिन्दी�कक्षा - 8 �भारत की खोज�पाठ- तनाव

प्रस्तुतकर्ता :-

सारिका

स्नातक- हिन्दी

जवाहर नवोदय विद्यालय, पेखूबेला, ऊना, हि. प्र.

संभाग – चण्डीगढ ।

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������कक्षा -8�����

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पंडित जवाहरलाल नेहरू

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लेखक के विषय में

  • जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को ब्रिटिश भारत में इलाहाबाद में हुआ। उनके पिता मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर, जो कश्मीरी पण्डित थे। मोतीलाल नेहरू सारस्वत कौल ब्राह्मण समुदाय से थे | स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए।

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  • उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू, जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थी | मोतीलाल की दूसरी पत्नी थी व पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी। जवाहरलाल तीन बच्चों में से सबसे बड़े थे

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  • जिनमें बाकी दो लड़कियां थी। बड़ी बहन विजयालक्ष्मी बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी। सबसे छोटी बहन कृष्णा हठीसिंग एक उल्लेखनीय लेखिका बनी और उन्होंने अपने परिवारजनों से संबंधित कई पुस्तकें लिखीं।

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1890 के दशक में नेहरू परिवार

  • जवाहरलाल नेहरू ने दुनिया के कुछ बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज लंदन से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की।

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  • इंग्लैंड में उन्होंने सात साल व्यतीत किए जिसमें वहां के फैबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद के लिए एक तर्कसंगत दृष्टिकोण विकसित किया।
  • जवाहरलाल नेहरू 1912 में भारत लौटे और वकालत शुरू की। 1916 में उनकी शादी कमला नेहरू से हुई। 1917 में जवाहर लाल नेहरू होम रुल लीग‎ में शामिल हो गए।

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  • राजनीति में उनकी असली दीक्षा दो साल बाद 1919 में हुई | जब वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए। उस समय महात्मा गांधी ने रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति खासे आकर्षित हुए।

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  • स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री का पद संभालने के लिए कांग्रेस द्वारा नेहरू निर्वाचित हुए यद्यपि नेतृत्व का प्रश्न बहुत पहले 1941 में ही सुलझ चुका था | जब गांधी जी ने नेहरू को उनके राजनीतिक वारिस और उत्तराधिकारी के रूप में अभिस्वीकार किया। जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री थे ।

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  • प्रधानमन्त्री के रूप में वे भारत के सपने को साकार करने के लिए चल पड़े। भारत का संविधान 1950 में अधिनियमित हुआ जिसके बाद उन्होंने आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक सुधारों के एक महत्त्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की। मुख्यतः एक बहुवचनी बहुदलीय लोकतन्त्र को पोषित करते हुए उन्होंने भारत के एक उपनिवेश से गणराज्य में परिवर्तन होने का पर्यवेक्षण किया।

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  • विदेश नीति में भारत को दक्षिण एशिया में एक क्षेत्रीय नायक के रूप में प्रदर्शित करते हुए उन्होंने गुटनिरपेक्ष आन्दोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई।
  • वे भारत में लोगों के बीच लोकप्रिय बने रहे । भारत में उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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�प्रकाशित पुस्तकें�

1 पिता के पत्र सुपुत्री के नाम – 1929

2 विश्व इतिहास की झलक (ग्लिंप्सेज ऑफ़ वर्ल्ड

हिस्ट्री) दो खंडों में- 1933

3 मेरी कहानी (ऐन ऑटो बायोग्राफी)- 1936

4 भारत की खोज (दि डिस्कवरी ऑफ इंडिया)-1945

5 राजनीति से दूर

6 इतिहास के महापुरुष

7 राष्ट्रपिता

8 जवाहरलाल नेहरू वाड्मय

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�भारत की खोज पुस्तक की रचना�

  • भारत की खोज की रचना 1944 में अप्रैल-सितंबर के बीच अहमदनगर के किले की जेल में हुई । यह पुस्तक 9 अगस्त 1942 से 28 मार्च 1945 के बीच के अपने साथियों और संबंधियों को समर्पित की गई है ।

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तिथियों का यह चुनाव संयोग भर नहीं है, बल्कि उस दौर की घटनाओं के प्रति नेहरू के गहरे सरोकार की ओर इशारा करता है। पुस्तक की भूमिका में नेहरू ने कारावास के प्रिय साथियों को बहुत सम्मान से स्मरण किया है ।

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कारावास के जीवन की कठिनाइयों और कष्टों के बावजूद उन्होंने असामान्य रूप से योग्य और सुसंस्कृत इन व्यक्तियों के साहचर्य को अपना सौभाग्य माना l इस रचना में भारत के इतिहास को घटनाक्रम में नहीं बल्कि संस्कृति की यात्रा के रूप में देखने और समझने का प्रयास है ।

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पाठ -8

तनाव

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कठिन शब्दों के अर्थ

  • तनाव = असमंजस की स्थिति
  • प्रतिनिधित्व = नेतृत्व करना
  • स्वीकृति = मंजूरी देना
  • समापन = समाप्ति
  • सम्मान पूर्वक = आदर के साथ

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पाठ के विषय में :-

भारत में तनाव सन 1942 के शुरू के महीनों में बढा । युद्ध का मंच लगातार निकट आता जा रहा था और भारत के शहरों पर हवाई हमलों की संभावना पैदा हो गई थी । जिन पूर्वी देशों में युद्ध जोरों पर था, वहां क्या होगा ? भारत और इंग्लैंड के संबंधों में क्या नया अंतर आएगा ?

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चुनौती - भारत छोड़ो प्रस्ताव�

बंबई में 7 और 8 अगस्त को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने खुली सभा में उस प्रस्ताव पर विचार किया और बहस की जो अब भारत छोड़ो प्रस्ताव नाम से जाना जाता है । वह एक लंबा और विशद प्रस्ताव था ।

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उसमें अंतरिम सरकार बनाने का सुझाव दिया गया था । ऐसी सरकार जो मिली - जुली हो , जिसमें सभी महत्वपूर्ण वर्गों के लोगों का प्रतिनिधित्व हो और जिसका पहला काम होगा मित्र शक्तियों के सहयोग से भारत की सुरक्षा और अपनी सारी हथियारबंद और अहिंसक शक्तियों के साथ बाहरी हमले को रोकना ।

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  • कांग्रेस कमेटी ने ‘संसार’ की आजादी के लिए ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र से फिर अपील की और इस बात की स्वीकृति देना तय किया कि गांधीजी के अपरिहार्य नेतृत्व हिंसात्मक ढंग से एक जन आंदोलन शुरू किया जाए। यह स्वीकृति उसी समय लागू होती जब गांधी जी ऐसा निर्णय लेते। अंत में कहा गया कि कमेटी कांग्रेस के लिए शक्ति हासिल करना नहीं चाहती । ताकत जब भी आएगी तो वह भारत की सारी जनता की होगी ।

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  • अपने समापन भाषणों में कांग्रेस- सभापति मौलाना अबुल कलाम आजाद और गांधी जी ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका अगला कदम होगा ब्रिटिस सरकार के प्रतिनिधि वायसराय से मुलाकात करना और खास संयुक्त राष्ट्रों के मुख्य अधिकारियों से एक संपूर्ण समझौते के लिए अपील करना ।

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8 अगस्त सन 1942 को काफी रात गए यह प्रस्ताव अंतत: पास हो गया । कुछ घंटे बाद 9 अगस्त की सुबह-सुबह बंबई में और पूरे देश में अनेक स्थानों पर बहुत सी गिरफ्तारियां हुई और इस तरह हम अहमदनगर के किले में आए ।

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प्रश्न:-

  • भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेने वाले किन्ही पाÆच स्वतन्त्रता सेनानियों के विषय में लिखें ।