BLESSINGS
ॐ ह्रीं अर्हम् नमः
श्रीसद्गुरुभ्यो नमः
ॐ ऐं नमः
SHREE MATI GYANAY NAMAH
SHREE SHRUT GYANAY NAMAH
SHREE AVADHI GYANAY NAMAH
SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH
SHREE KEVAL GYANAY NAMAH
5 GYAN
Inspired by:
Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.
Mahaveer Swami Bhav – 27 / Slide 51 - 62
Learn & turn part – 2 story NO 6
Picture No. 1
(१) अषाढ सुद ६ को, देवलोक से ब्राह्मणी देवानंदा की कुक्षी में प्रभुजी का च्यवन हुआ।
माताजी ने १४ स्वप्न देखे, माताजी के पूछने पर पति ऋषभदत्त ब्राह्ममण ने उसका फल बताया कि आप को अत्यंत पुन्य संपन्न,
गुण संपन्न पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी, बडा होकर वह पुत्र तीर्थकर बनेगा।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 Part1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 2
(२) ८२ दिनों के बाद,
इन्द्रसभा में बैठे इन्द्र महाराज ने भगवान की आत्मा को देवानंदा ब्राहमणी की कुक्षी में देखा।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 Part-1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 3
(३) हर्षित होकर शक्रस्तव (नमुत्थुणं सूत्र) द्वारा प्रभुजी की वंदना की।
उन्हें लगा की भगवान का जन्म तो क्षत्रियाणी की कुक्षी से ही होना चाहिए।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 4
(४) इसलिए इन्द्र ने हरिणैगमेषी देव को गर्भ संक्रमण यानि की प्रभु के गर्भ को देवानंदा की कुक्षी से उठाकर,
त्रिशला महाराणी के गर्भ में रखने की आज्ञा की।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 5
(५) इन्द्र की आज्ञा से हरिणैगमेषी देव द्वारा गर्भ संक्रमण की प्रक्रिया पूर्ण हुई ।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 part - 1
Learn & turn part 2 story no 5
Picture No. 6
(६) प्रभु के प्रभाव से त्रिशलारानी ने १४ स्वप्न देखे।
देवानंदा ब्राहमणी १४ स्वप्न को जाते हुए देखकर उदासीन हुए।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 21 part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 7
(७) त्रिशलारानी ने १४ महास्वप्न की बात अपने पति सिद्धार्थराजा को बताई।
राजाने उसका फल जानने के स्वप्नपाठको को बुलाया।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 8
(८) प्रभु के प्रचंड पुन्य से धन, धान्य आदि की वृद्धि हुई,
माता पिताने तय किया कि जब बालक का जन्म होगा तब बालक का नाम वर्धमान रखेंगे।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 9
(९) चैत्र सुद १३ के दिन प्रभुजी का जन्म हुआ एवं देव लोक से आयी ५६ दिक्कुमारीयों ने जन्म महोत्सव किया।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 21 part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 10
(१०) सौधर्म इन्द्र ने पंचरूप बनाकर प्रभुजी को मेरू पर्वत ले जाने के लिए प्रयाण किया।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 Part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 11
(११) अनगिनत देवो ने मेरू पर्वत पर अभिषेक महोत्सव किया।
बाल वर्धमान ने मेरू पर्वत का स्पर्श किया, मेरु पर्वत कंपित हुआ (हिलने लगा)।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 part - 1
Learn & turn part 2 story no 6
Picture No. 12
(१२) अभिषेक के बाद इन्द्र ने प्रभुजी को वापस माताजी के पास में रख दिया।
Bhagwan Mahaveer Swami Bhav – 27 Part - 1
Learn & turn part 2 story no 6