संजय की कहानी “टोपी” एक लोक कथा है। इस कहानी के द्वारा लेखक ने सामाजिक समस्याओं को उजागर करने का प्रयास किया है। यह कहानी शासक वर्ग से जनता के सम्बन्धों की समीक्षा करती है। लेखक ने इस कहानी में एक नन्हीं गौरैया के दृढ़ निश्चय और प्रयासों का वर्णन किया है और लेखक के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति नन्ही गौरैया से प्रेरित हो सकता है और अपने जीवन को सफल और अर्थ-पूर्ण बना सकता है। इसमें लेखक ने राजा और उसके मंत्रियों का जनता के ऊपर दबाव को बहुत ही अच्छे तरीके से दिखाया है। एक छोटी गौरैया भी राजा का सच को सभी जनता के सामने ला सकती, यह दिखाया गया है। लेखक ने यह समझाने का प्रयास भी किया है कि सबको उसके काम के बदले उचित मेहनताना मिले, पूरी मजदूरी मिले तो किसी को भी अच्छा काम करने में ख़ुशी मिलेगी और कोई भी अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ ख़ुशी-ख़ुशी करेगा।
टोपी
पाठ 18
यह कहानी एक गौरैया के जोड़े की है। उन दोनों में बहुत प्रेम था। एक-दूसरे के बगैर वे कोई भी काम नहीं करते थे। एक बार मादा गौरैया ने किसी मनुष्य को कपड़े पहने देखा तो उसकी प्रशंसा की परंतु नर गौरैया ने कहा कि वस्त्रों से मनुष्य सुन्दर नहीं लगता, वह तो मनुष्य के वास्तविक सौंदर्य को ढाक लेता है। परन्तु मादा गौरैया को टोपी पहनने का मन करता है, नर गौरैया कहता है कि हमें वस्त्रों की कोई आवश्यकता नहीं हम तो ऐसे ही ठीक हैं। मगर मादा गौरैया अपनी जिद की पक्की थी, उसने निश्चय कर लिया था कि वह टोपी बनवाकर ही रहेगी।
एक दिन उसे रूई का टुकड़ा मिला, जिसे पहले वह धुनिया के पास ले जा कर धुनवाती है, फिर सूत कतवाने के लिए कोरी के पास ले जाती है तथा दोनों को
बनवाई आधा-आधा हिस्सा मजदूरी दे देती है।
गौरैया धागा बनवाने के बाद बुनकर
के पास जाती है और बुनकर को
कपड़े का आधा हिस्सा मजदूरी देकर
तथा अपना कपड़ा लेकर दर्जी के पास जाती है तथा उसे भी उसकी मजदूरी देकर,
उससे दो टोपियाँ बनवा लेती है। दर्जी ने खु
श हो कर उसकी टोपी में पाँच
ऊन के फूल भी लगा दिए।
टोपी पाठ सार
चिड़िया की टोपी बहुत सुन्दर बनी थी। चिड़िया के मन में राजा से मिलने की इच्छा उत्पन्न हुई, तो वह राजा के महल की ओर उड़ चली। चिड़िया राजा के महल पहुँची, तो राजा छत पर मालिश करवा रहा था। चिड़िया ने राजा का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। राजा को क्रोध आ गया। उसने अपने सैनिकों को उस चिड़िया को मारने के लिये कहा पर सैनिकों ने उसे मारा नहीं राजा के कहने पर उसकी टोपी छीन ली।
राजा उसकी सुन्दर टोपी देखकर हैरान था कि उस चिड़िया के पास इतनी सुन्दर टोपी कहाँ से आई। राजा हैरान था की इतनी सुन्दर टोपी किसने बनाई। उसने अपने सेवकों द्वारा उस दर्ज़ी को बुलवाया। दर्जी ने टोपी सुन्दर बनने का कारण अच्छा कपड़ा बताया। इस प्रकार क्रमशः बुनकर, कोरी व धुनिया को बुलावा भेजा। उन्होंने बताया की उन्होंने बहुत अच्छा काम इसलिए किया है क्योंकि उन्हें मजदूरी बहुत अच्छी मिली थी।
चिड़िया ने राजा को कहा कि उसने सारा कार्य पूरी कीमत चुकाकर करवाया है। वह राजा पर आरोप लगाती है कि राजा
कंगाल है,
तभी प्रजा को बहुत सताता है,
उन पर कर लगाता है और तभी उसने उसकी
टोपी भी छीन ली है क्योंकि वह खुद इतनी अच्छी
टोपी नहीं बनवा सकता।
राजा को अपनी पोल खुलने का डर हो जाता है
इसलिए वह चिड़िया की टोपी वापस कर देता है।
चिड़िया राजा को डरपोक-डरपोक कहती हुई
निकल जाती है।
कठिन शब्द
फबता – सुन्दर
तपाक – जल्दी
बदसूरत – बुरा दिखना
लटजीरा – एक पौधा
कुदरती – स्वाभाविक
सुघड़ – सुन्दर
काया – तन
कटाव – आकार
रोंवें-रोंवें की रंगत – रंग
नए-नए लिबास – पहनावा या पोशाक
निरा – एकमात्र
पोंगापन – पागलपन
फकत – केवल
लाज – शर्म
वास्ते – लिए
उलट – दिवाला निकलना
चूक – भूल
उछलते – इज्जत जाना
सलामत – बनी रहे
फिकर – चिंता
तनिक – थोड़ा
शक्की – शक करने वाला
जिद्दी – जिद्द करने वाला
धुन की पक्की – कोई बात निश्चित कर
लेना, तो उसको पूरा करके ही दम लेना
ठान – निश्चित
जीवन का लक्ष्य – उद्देश्य
मामूल – नित्य-नियम
मुताबिक – अनुसार
घूरे – कूड़ा-करकट
फाहा – टुकड़ा
मनुहार – मनाना
जाड़े – सर्दी
तन – त्वचा
पुरानी तार-तार – फटी
मिर्जई – कपड़ा
चाम का दाम – अपना हुकुम चलाना
फोकट – मुफ्त
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प्रश्न-1 गवरइया और गवरा के बीच किस बात पर बहस हुई और गवरइया को अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर कैसे मिला?
प्रश्न-3 टोपी बनवाने के लिए गवरइया किस-किस के पास गई? टोपी बनने तक के एक-एक कार्य को लिखें।
प्रश्न-4 गवरइया की टोपी पर दर्जी ने पाँच फुँदने क्यों जड़ दिए?
प्रश्न-2 गवरइया और गवरे की बहस के तर्कों को एकत्र करें और उन्हें संवाद के रूप में लिखें।
प्रश्न-अभ्यास