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१३.विशेष अध्ययन हेतु :�नुक्कड़ नाटक

११वी हिंदी युवकभारती महाराष्ट्र बोर्ड

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नुक्कड़ (Street corner) + नाटक (drama,play) = Street show नुक्कड़ नाटक

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नुक्कड़ नाटक की विशेषताएँ :-

(१) तात्कालिकता : किसी भी घटना, समस्या का वर्तमान जीवन पर सीधे असर होता है। नुक्कड़ नाटक का लेखक किसी तात्कालिक ज्वलंत समस्या को लिखकर उसकी प्रस्तुति करता है ताकि उस विषय के प्रति लोगों में

जागरूकता निर्माण हो।

(२) गतिशीलता : नुक्कड़ नाटक के विषय का चयन करते हुए इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इसकी प्रवाहमयी धारा में विषय, पात्र तथा दर्शक तेजी से गंतव्य की ओर बढ़ें । नाटक के अंत तक किसी को कुछ सोचने का

अवकाश नहीं मिलता । इसमें कथ्य और शिल्प का फैलाव नहीं होता ।

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(३) अचूक लक्ष्य : नुक्कड़ नाटक हथियार की तरह जड़ पारंपरिक रूढ़ियों द्‌वारा किए जा रहे शोषण, अनाचार को खत्म कर वर्गहीन समाज की स्थापना के लिए काम करता है ।

(4) संक्षिप्तता : नुक्कड़ नाटक में संक्षिप्तता का तत्त्व अनिवार्य है । लंबे-लंबे संवाद या विषय का विस्तार इन नाटकों को उबाऊ बना देते हैं । नुक्कड़ नाटक जितना संक्षिप्त होगा, उसका प्रभाव उतना ही अधिक होगा।

�(5) सहज भाषा और व्यंग्य शैली : नाटककार नुक्कड़ नाटक को प्राय: सहज भाषा और व्यंग्य शैली में प्रस्तुत करता है । बीस-पच्चीस मिनट में किसी गंभीर समस्या का जनभाषा में प्रस्तुतीकरण नुक्कड़ नाटक की

स्वाभाविकता और रोचकता को बढ़ाता है ।

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लेखक: अरविंद गौड़

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आज के लिए इतना ही।

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