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नीलकंठ

महादेवी वर्मा

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लेखक परिचय:- महादेवी वर्मा हिंदी की प्रमुख कवयित्री हैं ।इन्हें आधुनिक मीरा भी कहां जाता है

जन्म :-26 मार्च 1907 फर्रुखाबाद,उत्तर प्रदेश

रचनाएं – नीहार, दीपशिखा, रश्मि, नीरजा, यामा, स्मृति की रेखाएँ, अतीत के चलचित्र।

पुरस्कार:- पद्मभूषण, पद्म विभूषण, ज्ञानपीठ, मंगला प्रसाद पारितोषिक, भारत भारती इत्यादि।

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महादेवी वर्मा को पशु पक्षियों से विशेष लगाव था। जब वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या थीं तो वहाँ पर उन्होंने अनेक पशु पक्षियों को पाल रखा था ।इन्होंने अनेक कहानियां पशु पक्षियों को लेकर लिखी है।जैसे सोना, गिल्लू, गौरा इत्यादि। सोना में एक हिरनी की कथा है। गिल्लू गिलहरी के बच्चे को लेकर लिखी गई है तथा गौरा गाय पालन से संबंधित है।

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नीलकंठ पाठ महादेवी वर्मा रचित एक रेखा चित्र है।रेखा चित्र हिंदी साहित्य की एक प्रमुख विधा है किसी व्यक्ति ,वस्तु या घटना का कम से कम शब्दों में मर्मस्पर्शी सजीव चित्रण ही रेखा चित्र है। अर्थात किसी वस्तु या व्यक्ति का शब्दों के माध्यम से ऐसा चित्रण जो सजीव हो या जिसे पढ़कर उस व्यक्ति या वस्तु का चित्र आंखों के सामने उपस्थित हो जाए उसे रेखाचित्र कहते हैं।

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पाठ का सारांश :

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शब्दार्थ:

  • मूंजी- कंजूस
  • आविर्भूत- उत्पन्न होना
  • अभिमानिनी- घमंडी
  • आर्तक्रंदन- पीड़ा से कराहना
  • कर्णवेध- कानों को बेधना
  • उष्णता- गरमी
  • ग्रीवा- गर्दन

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प्रस्तुति:-

वीणा कुमारी

टी.जी.टी हिन्दी

ज. न. वि अररिया