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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH - PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 20

7 Lakh Sootra – 84 Lakh Yoni

Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 20

सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

लाख पृथ्वीकाय

(१) पृथ्वीकाय: पत्थर, नमक, खुदी हुई जमीन, धातु आदि।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

लाख अपकाय

(२) अपकाय: सब तरह का पानी, बर्फ की चीजे, बारिश, शावर, स्वीमींगपुल आदि।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

७ लाख तेउकाय

(३) तेउकाय: सब प्रकार के अग्नि, चूला, गेस, लाईट, बीजली से चलती हुई सब चीजे, दिया, पटाखे फूटते है तब इत्यादि।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

७ लाख वायुकाय

(४) वायुकाय: हवा, पवन, पंखा, ए.सी. कुलर.

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

७ लाख प्रत्येक वनस्पतिकाय

(५) प्रत्येक वनस्पतिकाय: १ शरीर में १ जीव होता है, सब सब्जी, फल, धान्य, फूल, फलिया, आदि.

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

७ लाख साधारण वनस्पतिकाय

(६) साधारण वनस्पतिकाय: १ शरीर में अनंत जीव होते है, कंदमूल, लील, शेवाल, फूग, बिल्ली के टोप, बेबीकोर्न आदि। यहाँ तक सब एकेन्द्रिय है।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

लाख बेइन्द्रिय

(७) बेइन्द्रिय: स्पर्शेन्द्रिय तथा रसन्द्रिय अळसिया, कृमि, बेक्टेरिया, इयल, बासी भोजन में, ४ महाविगई में, चलित रस में, अगले दिन का ब्रेड।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

लाख तेइन्द्रिय

(८) तेइन्द्रिय: घ्राणेन्द्रिय (नाक) कीडी, मकोडा, मांकड।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

२ लाख चौरेन्द्रिय

(९) चौरेन्द्रिय: चक्षुरिन्द्रिय वाले मक्खी, मच्छर, भमरा, मधमाखी, पतंगिया, वांदा आदि।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

लाख देवता

(१०) पंचेन्द्रिय देवता: ४ प्रकार के भवनपति, व्यंतर, ज्योतिष, वैमानिक।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

लाख नरक

(११) नरक: अधोलोक ७ नरक भयंकर वेदना, क्षणे क्षणे।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

सिद्ध

(१२) सिद्ध: बिना शरीर इन्द्रिय नहि होती है। हम सब को धर्म की आराधना द्वारा, सर्व कर्म का नाश करके सिध्ध (मुक्त) होना है।

वहाँ मात्र सुख सुख और सुख ही है।

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

A-जलचर

B- स्थलचर

C- खेचर

तिर्यंच पंचेन्द्रिय के ३ विभाग है।

(१३) जलचर: पानी में रहते है मछलियाँ।

(१४) स्थलचर: कुत्ता, बिल्ली, गधा, घोडा, आदि पशु।

(१५) खेचर: आकाश में उडने वाले पक्षी ।

नोंध: उभयचर - मेढक, साप, मगरमच्छ, कछुआ आदि जीव को उभयचर कहते है क्योंकि वह पानी और जमीन दोनो पर जी सकते है।

लाख तिरियांच पंचेंद्रिया

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सात लाख सूत्र८४ लाख योनि

१४ लाख मनुष्य

(१६) मनुष्य: उसके दो प्रकार :-

(१) समूच्छिम मनुष्यो: एंठा (जुठा) भोजन, मळ, थूक, कफ, मूत्र आदि अशुचि पदार्थों में ४८ मिनिट के बाद उत्पन्न होते है।

जूठा भोजन रखने से १ आयंबिल का दंड आता है।

(२) गर्भज: हमारे जैसा स्त्री और पुरूष।

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