बाजार दर्शन
लेखक:-जैनेंद्र कुमार
प्रस्तुतकर्ता:-अभय सिंह यादव
बाजार दर्शन :-जैनेंद्र कुमार
जीवन परिचय:- जैनेंद्र कुमार
साहित्यिक परिचय :- जैनेंद्र कुमार
प्रमुख कृतियाँ |
उपन्यास:-
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कहानी संग्रह:-
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निबंध संग्रह:-
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प्रमुख कृतियाँ |
सम्मान और पुरस्कार:-
हिन्दी साहित्य में स्थान:-
प्रेमचंद और जैनेन्द्र:-
अनावश्यक क्रय- |
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लेखक के मित्र एक मामूली चीज खरीदने बाजार गए थे। लौटे तो उनके साथ अनेक बण्डल थे। इस फिजूलखर्ची के लिए उन्होंने अपनी पत्नी को जिम्मेदार बताया। स्त्रियाँ अधिक सामान बाजार से खरीदती हैं। यह ठीक है किन्तु पुरुष अपना दोष पत्नी पर डालकर बचना चाहते हैं। खरीदारी में एक अन्य चीज का भी महत्व है। वह है मनीबैग अर्थात् पैसे की शक्ति। |
पाठ का सार:- |
पैसे की पॉवर:-
बाजार का जादू :–
बाजार में आकर्षण होते है। उसमें प्रदर्शित वस्तुएँ ग्राहक को आकर्षित करती हैं कि वह उनको खरीदे। इस आकर्षण से बहुत कम लोग बच पाते हैं। संयमहीन व्यक्ति को बाजार कामना से व्याकुल ही नहीं पागल बना देता है, उसमें असन्तोष ईर्ष्या और तृष्णा उत्पन्न करके उसको बेकार कर देता है
जादू से रक्षा:–
खाली और बन्द मन:–
चूरनवाले भगत जी –
पैसे की व्यंग्य शक्ति –
बाजार की सार्थकता:-
शब्द छवि:-�
गृहकार्य:-
प्रस्तुतकर्ता:-
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धन्यवाद |