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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH - PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 29

7th Vrat: (B) Karman Vratrmadan Vi

Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 29

सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

सातवें व्रत के बीस अतिचारों में से पाँच भोजन सम्बन्धी हैं

आजीविका एवं वाणिज्य व्यवसाय सम्बन्धी पन्द्रह अतिचार १५ कर्मादान नाम से भी प्रसिद्ध हैं।

धर्ममय आजीविका तभी हो सकती है जब गृहस्थ न्याय-नीति की कमाई में सन्तुष्ट हो। यदि उसमें तृष्णा की अधिकता होगी तो वह निषिद्ध व्यवसाय भी करेगा।

श्रावक निषिद्ध व्यवसायों का त्याग करता है। वे निषिद्ध व्यवसाय 'कर्मादान' कहलाते हैं।

कर्मादान का अर्थ है- महापापपूर्ण व्यवसाय, कर्मादान की संख्या पन्द्रह है।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

अंगारकर्म

(१) अंगारकर्म - अग्नि सम्बन्धी व्यापार, जैसे कोयले बनाना, ईंटें पकाना, भड़भूजा, लुहार आदि का व्यवसाय ।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

वनकर्म

(२) वनकर्म - वनस्पति के छेदन-भेदन सम्बन्धी व्यापार, जैसे-वृक्ष काटना, घास काटना आदि।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

शकटकर्म

(३) शकटकर्म - वाहन सम्बन्धी व्यापार, जैसे गाड़ी, मोटर, ताँगा, रिक्शा आदि का व्यापार करना।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

भाटीकर्म

(४) भाटीकर्म - ऊँट, बैल, खच्चर, घोड़ा वाहन आदि किराये पर देना, इससे उन जीवों पर अतिभार लादकर उन्हें कष्ट दिया जाता है।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

स्फोटककर्म

(५) स्फोटककर्म - भूमि फोड़ने का व्यापार, जैसे-खानें खुदवाना नहरें बनवाना मकान बनाने का व्यवसाय, कितने चिंतक कृषि कर्म को स्फोटककर्म मानते हैं, पर कृषिकर्म स्फोटककर्म नहीं है।

उसमें जमीन फोड़ी नहीं जाती, खोदी व कुरेदी जाती है।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

दन्त वाणिज्य

(६) दन्त वाणिज्य - हाथी दाँत आदि का व्यापार।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

लाक्षा वाणिज्य

(७) लाक्षा वाणिज्य - लाख आदि बनाने का व्यापार ।

इसमें अनेक त्रस जीवों की हिंसा होती है।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

रस वाणिज्य

(८) रस वाणिज्य - मदिरा, मधु, मांस आदि बनाने व बेचने का व्यापार।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

केश वाणिज्य

(९) केश वाणिज्य - मनुष्यों व पशुओं आदि के बालों व बाल वाले प्राणियों का व्यापार।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

विष वाणिज्य

(१०) विष वाणिज्य - जहरीले पदार्थ एवं हिंसक अस्त्र-शस्त्रों का व्यापार।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

यन्त्रपीडन कर्म

(११) यन्त्रपीडन कर्म - तेल की घानी या मशीन चलाने आदि का धन्धा करना।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

निर्लाछन कर्म

(१२) निर्लाछन कर्म - प्राणियों के अवयवों को छेदने, काटने आदि का व्यवसाय जैसे गधे व कुत्तों के कान, पूँछ आदि काट देना।

बैल आदि को बधिया (नपुसक) बनाना आदि।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

दावाग्निदापन कर्म

(१३) दावाग्निदापन कर्म - जंगल, खेत आदि में आग लगाने का कार्य इससे वन में रहने वाले अगणित पशु-पक्षी आदि वन्य जीवों का विनाश हो जाता है।

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

सर

(१४) सर - द्रह तड़ाग-शोषणता कर्म-सरोवर, झील, तालाब आदि को सुखाने का कार्य।

इससे अगणित जलचर जीवों का नाश होता है

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सातवा व्रत (ब) १५ कर्मादान विरमण व्रत

वंदितु गाथा क्रमांक २२, २३ के अनुसार

असतीजन पोषणता कर्म

(१५) असतीजन पोषणता कर्म - कुलटा स्त्रियों का पालन पोषण करना ।

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