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 कक्षा      -        सात

किताब का नाम    बाल महाभारत कथा

पाठ का नाम-  भूरिश्रवा

प्रस्तुतकर्ता  - हीरालाल, टी.जी.टी., हिंदी 

जवाहर नवोदय विद्यालय रायबरेली ,उत्तर प्रदेश

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  • उधर अर्जुन सिंधुराज जयद्रथ के साथ युद्ध कर रहा था और उसका वध करने के मौके की तलाश में था। इतने में भूरिश्रवा ने सात्यकि को ऊपर उठाया और ज़मीन पर ज़ोर से दे पटका।'कौरव-सेना जोरों से कोलाहल कर उठी- “सात्यकि मारा गया।
  •  अर्जुन ने देखा कि मैदान में मृत-से पड़े सात्यकि को भूरिश्रवा घसीट रहा है। यह देखकरअर्जुन भारी असमंजस में पड़ गया। उसे कुछ नहीं सूझा कि क्‍या किया जाए। वह श्रीकृष्ण से बोला-“कृष्ण,भूरिश्रवा मुझसे लड़ नहीं रहा है। दूसरे के साथ लड़नेवाले पर कैसे बाण चलाऊँ?”

 

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  • अर्जुन इस प्रकार श्रीकृष्ण से बातें कर ही रहा था कि इतने में जयद्रथ द्वारा छोड़े गए बाणों के समूह आकाश में छा गए। इस पर अर्जुन ने बातें करते-करते ही जयद्रथ पर बाणों की बौछार जारीरखी।
  •   ज्योंही अर्जुन ने सात्यकि की ओर मुड़कर देखा तो पाया कि सात्यकि ज़मीन पर पड़ा हुआ था और भूरिश्रवा उसके शरीर को एक पाँव से दबाकर और दाहिने हाथ में तलवार लेकर उस पर वार करने को उद्यत ही था।
  • यह देखकर अर्जुन से रहा न गया।उसने उसी क्षण भूरिश्रवा पर तानकर बाण चलाया।बाण लगते ही भूरिश्रवा का दाहिना हाथ कटकर तलवार समेत दूर ज़मीन पर जा गिरा।

 

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  • अपना हाथ कट जाने पर जब भूरिश्रवाने कृष्ण की निंदाकी, तो अर्जुन बोला-“वृद्ध भूरिश्रवा! तुमने मेरे प्रिय मित्र सात्यकि का वध करने की कोशिश की हैऔर वह भी उस समय जबकि वह घायल और अचेत-सा होकर ज़मीन पर निःशस्त्र पड़ा हुआ था। उस अवस्था में तुमने उसे तलवार से मारना चाहा। जिसके हथियार टूट चुके थे,कवच नष्ट हो चुका थाऔर जो इतनाथका हुआ था कि जिसके लिए खड़ा रहना भी दूभर था,ऐसे मेरे कोमल बालकअभिमन्यु का वध होने पर तुम सभी लोगों ने'विजयोत्सव मनाया था। तुम्हीं बताओ कि ऐसा करना किस धर्म के अनुसार उचित था?”

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  • अर्जुन के इस प्रकार मुँहतोड़ जवाब देने पर भूरिश्रवा युद्ध के मैदान में शरों को फैलाकरऔर आसन जमाकर बैठ गया। उसने वहींआमरण अनशन शुरू कर दिया।
  • यह सबदेखकर अर्जुन बोला-“वीरो! तुम सब मेरी प्रतिज्ञा जानते हो। मेरे बाणों की पहुँच तकअपने किसी भी मित्र या साथी का शत्रु केहाथों वध होने देने का प्रण मैंने कर रखा है।इसलिए सात्यकि की रक्षा करना मेरा धर्म था।

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  • अर्जुन की ये बातें सुनकर भूरिश्रवा ने भी शांति से सिर नवाया और ज़मीन पर टेक दिया। इन बातों में कोई दो घड़ी का समय बीत गया था।सब लोगों के मना करते हुए भी सात्यकि ने भूरिश्रवा का सिर धड़ से अलग कर दिया।सात्यकि के कार्य को सबने निकृष्ट कहकर धिक्‍कारा।

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गृह कार्य

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो-

  1. कौरव-सेना जोरों से कोलाहल क्यों कर उठी?
  2. अर्जुन ने मैदान में क्‍या देखा?
  3. भूरिश्रवा द्वारा कृष्ण की निंदा करने पर अर्जुन ने क्या जवाब दिया?
  4. भूरिश्रवा की मृत्यु कैसे हुई?