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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH - PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 18

22 Abhakshya Part - 3

Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 18

बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

(१५) बहुबीज : जिन सब्जियों और फलों में दो बीज के बीच अंतर न हो, वे एक दूसरे से सटे हुए हो, गुदा थोडा और बीज बहुत हो, खाने योग्य थोडा और फेंकने योग्य अधिक हो, जैसे कवठ का फल, खसखस, टिंबरु, पंपोटा आदि।

उनको खाने से पित्त-प्रकोप होता है और आरोग्य की हानि होती है।

खस्खास 15/1

हरा अंजीर 15/2

अंजीर 15/3

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

(१६) अनंतकाय-जमीनकंद: जिस के एक शरीर में अनंत शरीर हो, उसे साधारण वनस्पति कहते हैं, जिसकी नसें, संधि, गांठ, तंतू आदि न दिखते हो, काटने पर समान भाग होते हो, काटकर बोने पर भी पुनः उग जाते हो उसे अनंतकाय कहते हैं।

आलू 16/1

शकरकंद 16/2

मूली 16/3

गाजर 16/4

प्याज 16/5

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

मशरूम 16/6

जिसे खाने से अनंत जीवों का नाश होता है।

जैसे आलू, प्याज, लहसून, गीली हल्दी, अदरक, मूला, शकर कंद, गाजर, सूरन कंद, कुँआरपाठा आदि ३२ अनंतकाय त्याज्य है।

जिन्हें खाने से बुद्धि विकारी, तामसी और जड़ बनती है। धर्म विरुद्ध विचार आते हैं।

लहसुन 16/7

अदरक 16/8

हरी हल्दी 16/9

अंकुरित 16/10

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

(१७) आचार: कोई आचार दूसरे दिन तो कोई तीसरे दिन और कोई चौथे दिन अभक्ष्य हो जाता है।

आचार में अनेक त्रस जंतु उत्पन्न होते हैं और अनेक मरते हैं।

जिन फलों में खट्टापन हो अथवा जो वैसी वस्तु में मिलाया हुआ हो ऐसे आचार में तीन दिनों के बाद त्रस जीव उत्पन्न हो जाते हैं।

परंतु आम, नींबू आदि वस्तुओं के साथ न लिया हुआ गूंदा, ककडी, पपिता, मिर्च आदि का अचार दूसरे दिन अभक्ष्य हो जाता है।

जिस आचार में सिकी हुई मेथी डाली गयी हो, वह भी दूसरे दिन अभक्ष्य हो जाता है।

मेथी डाला हुआ आचार कच्चे दूध दही या छाछ के साथ नहीं खाना चाहिए।

आचार 17

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

चटनी का भी इसी तरह समझना चाहिए। अच्छी तरह से धूप में न सुखाया हुआ आम, गूंदा और मिर्ची का अचार भी तीन दिनों के बाद अभक्ष्य हो जाता है।

अच्छी तरह से धूप में कडक होने के बाद तेल, गुड आदि डालकर बनाया हुआ आचार भी वर्ण, गंध, रस और स्पर्श न बदले तब तक भक्ष्य होता है, बाद में अभक्ष्य हो जाता है।

फूलन आने के बाद आचार अभक्ष्य माना गया है।

गीले हाथ या गीला चम्मच डालने से आचार में फूलन आ जाने के कारण वह अभक्ष्य हो जाता है।

अतः अनेक त्रस जंतुओं की हिंसा से बचने के लिए आचार का त्याग करना लाभदायी है।

आचार 17

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

(१८) द्विदल: जिस में से तेल न निकलता हो, दो समान भाग होते हो और जो पेड के फलस्वरुप न हो ऐसे दो दलवाले पदार्थों को कच्चे दूध, दही या छाछ के साथ मिलाने से तुरन्त बेइन्द्रिय जीवों की उत्पत्ति हो जाती है।

मेथी थेपला और दही 18/1

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

जीव हिंसा के साथ आरोग्य भी बिगड़ता है। अतः अभक्ष्य है।

जैसे मूंग, मोठ, उड़द, चना, अरहर, वाल, चंवला, कुलथी, मटर, मेथी, गँवार तथा इनके हरे पत्ते, सब्जी, आटा व दाल और इनकी बनी हुई चीजें, जैसे मेथी का मसाला, आचार, कढ़ी, सेव, गाँठिये, खमण, ढोकला, पापड, बूँदी, बडे व भजिएँ आदि पदार्थों के साथ दही या कच्चा दूध मिश्रित हो जाने पर अभक्ष्य हो जाते हैं।

दही वड़ा 18/2

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

भोजन के समय ऐसे खाद्य पदार्थों का विशेष ध्यान रखना जरुरी है।

होटल के दही बडे आदि कच्चे दही के बनते हैं अतः वे अभक्ष्य कहलाते हैं।

इस तरह उनका त्याग रखना योग्य है।

छाछ और दाल चावल 18/3

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

श्रीखंड, दही, मठ्ठे के साथ दो दल वाली चीजें नहीं खाना चाहिए।

दूध-छाछ, दही को अच्छी तरह से गरम करने के बाद उसके साथ दो दलवाले पदार्थ खाने में कोई दोष नहीं है।

श्रीखंड और पापड़ 18/4

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

(१९) बैंगन : बैंगन में असंख्य छोटे-छोटे बीज होते हैं।

उसके टोप के डंठल में सूक्ष्म त्रस जीव भी होते हैं।

बैंगन खाने से तामसभाव जागृत होता है। वासना-उन्माद बढ़ता है।

मन ढीठ बनता है।

निद्रा व प्रमाद भी बढ़ता है, बुखार व क्षय रोग होने की संभावना रहती है।

ईश्वर स्मरण में बाधक बनता है।

पुराणों में भी इसके भक्षण का निषेध किया गया है।

बैंगन 19

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बाईस (२२) अभक्ष्य पार्ट - ३

अभक्ष्य नं. १५ से २०

(२०) अनजाना फल, पुष्प: हम जिसका नाम और गुणदोष नहीं जानते वे पुष्प और फल अभक्ष्य कहलाते हैं, जिनके खाने से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं, तथा प्राणनाश भी हो सकता है।

अतः अनजानी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। अनजाना फल नहीं खाना इस नियम से वंकचूल बच गया और उसके साथी किंपाक के जहरीले फल खाने से मृत्यु का शिकार बन गये।

अनजाना फल 20

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