राम की शक्ति पूजा – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
राम की शक्तिपूजा का ऐतिहासिक संदर्भ�
संवेदनात्मक उद्देश्य�
सार्वभौमिकता का तत्व�
कविता का पाठावलोकन�’
ऐसे क्षण अंधकार घन में जैसे विद्युत
जागी पृथ्वी-तनया-कुमारिका-छवि, अच्युत
फिर देखी भीमा मूर्ति, आज रण देखी जो
आच्छादित किये हुए सम्मुख समग्र नभ को
ज्योतिर्मय अस्त्रसकल बुझ बुझकर हुए क्षीण
पा महानिलय उस तन में क्षण में हुए लीन
तोड़ता बंध – प्रतिसंध धरा…
शत वायु वेग बल, डुबा अतल में देश भाव ।
सारांश
धन्यवाद