कहानी पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
कक्षा :
दिनांक:
एक व्यक्ति के जीवन में समस्याएं बहुत अधिक थीं। बचपन से ही उसे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। पिता का देहांत हो चुका था और बचपन में ही माता, भाई-बहनों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उसके ऊपर आ गई थी। बड़े होने पर व्यक्ति का विवाह हुआ, लेकिन शादी के बाद उसकी समस्याएं और अधिक बढ़ गईं। उसके जीवन में एक परेशानी खत्म होती तो दूसरी आ जाती थी। एक दिन वह प्रसिद्ध संत के पास गया।
व्यक्ति ने संत से कहा कि मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं परेशान हो गया हूं, बहुत दुखी हूं। संत ने कहा कि ठीक तुम मेरे शिष्य बन जाओ। मुझे बताओ क्या परेशानी है?
शिष्य ने कहा कि गुरुजी एक समस्या खत्म नहीं होती और दूसरी सामने आ जाती है, इस कारण मैं बहुत दुखी रहता हूं। किसी भी काम में सफलता नहीं मिल पाती है।
गुरु ने कहा कि ठीक है, मैं तुम्हारी समस्याओं का हल बता दूंगा। अभी तुम मेरे साथ चलो। गुरु नए शिष्य को लेकर नदी किनारे गए। किनारे पर पहुंचकर गुरु ने कहा कि हमें ये नदी पार करनी है, ये बोलकर वहीं खड़े हो गए। शिष्य भी गुरु के साथ खड़ा हो गया।
कुछ देर बाद शिष्य ने कहा कि गुरुदेव हमें नदी पार करनी है तो हम यहां क्यों खड़े हैं?
गुरु ने जवाब दिया कि हम इस नदी के सूखने का इंतजार कर रहे हैं, जब ये सूखेगी हम इसे आसानी से पार कर लेंगे।
शिष्य को आश्चर्य हुआ। वह बोला, गुरुजी ये कैसी बात कर रहे हैं? नदी का पानी कैसे और कब सूखेगा। हमें नदी को इसी समय पार कर लेना चाहिए। संत ने कहा कि मैं तुम्हें यही बात समझाना चाहता हूं। जीवन में भी समस्याएं तो आती ही रहेंगी। हमें रुकना नहीं है, लगातार आगे बढ़ते रहना है। तभी तो हम उन्हें हल कर पाएंगे। आगे बढ़ते रहेंगे तो समस्याओं के हल मिलते जाएंगे। अगर रुक जाएंगे तो एक भी बाधा पार नहीं हो पाएगी। शिष्य को गुरु की बात समझ आ गई और उस दिन के बाद उसकी सोच बदल गई।
Q 1. दुःखी व्यक्ति किसके पास गया
Q 2. किसने कहा की वह व्यक्ति की समस्यायों का हल बताएगा
Q 3. गुरु और शिष्य कहा गये ?
Q 4. गुरु और शिष्य किसका इंतजार करने लगे ?
विलोम शब्द
जीवन
शिष्य
बहुत
दु:खी
रुकना
आगे
देर
आसान
कहानी-2
डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवन में बहुत से कष्ट सहे लेकिन कभी भी अपनी शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया. वह हर दिन 14 से 18 घंटे तक अध्ययन किया करते थे. शिक्षा के प्रति उनकी ललक और जी तोड़ मेहनत का ही परिणाम था कि बड़ौदा के शाहू महाराज जी ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेज दिया था.
बाबासाहेब को किताबें पढने का बड़ा शौक था. माना जाता है कि उनकी पर्सनल लाइब्रेरी दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत लाइब्रेरी थी, जिसमे 50 हज़ार से अधिक पुस्तकें थीं.
डॉ. आंबेडकर जब अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. वह रोज सुबह लाइब्रेरी खुलने से पहले ही वहां पहुँच जाते थे और सबके जाने के बाद ही वे वहां से निकलते थे. यहाँ तक कि वे कई बार लाइब्रेरी की टाइमिंग ख़त्म होने के बाद भी वहां बैठे रहने की अनुमति माँगा करते थे.
Q 13. डॉ. आंबेडकर प्रतिदिन कितने घंटे पढ़ते थे ?
Q 14. शिक्षा के प्रति उनकी ललक को देख कर कहाँ के महाराज ने उन्हें पढने के लिये बाहर भेजा ?
Q 15.बाबा साहेब की व्यक्तिगत लाइब्रेरी में कितनी पुस्तकें थी
Q 16. डॉ. आंबेडकर किस यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे ?