आलो- आँधारि
लेखिका – बेबी हालदार
कक्षा : ग्यारहवीं
वितान भाग – 1
लेखिक परिचय एवं
पाठ परिचय
प्रस्तुतकर्ता - श्याम लाल
पी.जी. टी. हिन्दी
केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 2 भुज
लेखिका परिचय (बेबी हालदार)
जीवन परिचय –
पाठ परिचय :-
आलो आँधारि’ पाठ में एक ऐसी दुनिया है जो हमारे साथ है ,लेकिन अनदेखी है |इस दुनिया में प्रवेश कराने कोशिश ही इस आत्मकथा के अंश में दिखाई देती है |यह कहानी है उन लाखों,करोड़ों झुग्गियों जिसमें झांकना भी भद्रता के तकाजे से बाहर है | यह चुनौती है साहित्य के उन पहरूओ को जो साहित्य को एक साँचे में देखने के आदि है ,जो समाज के कोने अंतरे पनपते साहित्य को हाशिये पर रखते है और भाषा एवं साहित्य को एक खास वर्ग की जागीर मानते है |
बेबी इस कथा की नायिका भी है और लेखिका भी | मात्र 13 वर्ष की उम्र में सातवीं की पढ़ाई अधूरी छोड़ एक अधेड़ से ब्याह दी जाती है और जीवन की सबसे संवेदनशील उम्र में तीन बच्चों की माँ बन जाती है | वही बेबी पति की ज्यादतियों को बर्दाश्त न कर एक ऐसी यात्रा जो न् तो उसने पहाड़ों पर की ,न् समुद्र तट पर और न ही स्टडी रूम में बैठकर | ऐसी आप बीती जो मूलत: बांग्ला में लिखी गई लेकिन पहली ऐसी रचना जो छपकर बाजार में आने से पहले ही अनूदित रूप में हिन्दी में आई|अनुवादक प्रबोध कुमार ने एक जबान को दूसरी जबान दी पर रूह को छुआ नहीं |एक बोली की भावना दूसरी बोली में बोली,रोई,मुस्कराई (आलो आँधारि की भूमिका से ) अनुवाद के नाम पर मात्र अंग्रेजी से होने वाले अनुवादों के बीच भारतीय भाषाओं में रची बसी हिन्दी का एक अनुकरणीय नमूना है – आलो- आँधारि |
पाठ सार-1
लेखिका अपने पति से अलग किराए के मकान में अपने तीन छोटे बच्चों के साथ रहती थी। उसे हर समय काम की तलाश रहती थी। वह सभी को अपने (लेखिका) लिए काम ढूँढ़ने के लिए कहती थी। शाम को जब वह घर वापिस आती तो पड़ोस की औरतें काम के बारे में पूछतीं। काम न मिलने पर वे उसे सांत्वना देती थीं। लेखिका की पहचान सुनील नामक युवक से थी। एक दिन उसने किसी मकान मालिक से लेखिका को मिलवाया। मकान मालिक ने आठ सौ रुपये महीने पर उसे रख लिया और घर की सफाई व खाना बनाने का काम दिया। उसने पहले काम कर रही महिला को हटा दिया। उस महिला ने लेखिका से भला-बुरा कहा। लेखिका उस घर में रोज सवेरे आती तथा दोपहर तक सारा काम खत्म करके चली जाती। घर जाकर बच्चों को नहलाती व खिलाती। उसे बच्चों के भविष्य की चिंता थी।
पाठ का सार-2
पाठ का सार-3
� पार्क में नए-नए लोगों से मुलाकात होती। उसकी पहचान बंगाली लड़की से हुई जो जल्दी ही वापिस चली गई। लोगों के दुर्व्यवहार के कारण उसने पार्क में जाना छोड़ दिया। लेखिका को किताब, अखबार पढ़ने व लेखन-कार्य में आनंद आने लगा। तातुश के जोर देने पर वह अपने जीवन की घटनाएँ लिखने लगी। तातुश के दोस्त उसका उत्साह बढ़ाते रहे। एक मित्र ने उसे आशापूर्णा देवी का उदाहरण दिया। इससे लेखिका का हौसला बढ़ा और उसने उन्हें जेठू कहकर संबोधित किया। एक दिन लेखिका के पिता उससे मिलने पहुँचे। उसने उसकी माँ के निधन के बारे में बताया। लेखिका के भाइयों को पता था, परंतु उन्होंने उसे बताया नहीं। लेखिका काफी देर तक माँ की याद करके रोती रही। बाबा ने बच्चों से माँ का ख्याल रखने के लिए समझाया। लेखिका पत्रों के माध्यम से कोलकाता और दिल्ली के मित्रों से संपर्क रखने लगी। उसे हैरानी थी कि लोग उसके लेखन को पसंद करते हैं।�
पाठ का सार-4
पाठ का सार-5
शब्दार्थ
स्वामी-पति’ चुक-चुक-अफसोस जताने का भाव। अनसुनी-बिना सुने हुए।फौरन-तुरंत। गेट-दरवाजा। विधवा-वह महिला जिसका पति मर गया हो।राजी-सहमत। बकते-बकते-गालियाँ देते हुए। ढेर-काफी। बाबा-पिता। सुयोग-अच्छा अवसर। चेष्टा-प्रयास। रोज-प्रतिदिन। दादा-बड़ा भाई। भाड़ा-किराया। रेडी-तैयार। गुजारा-निर्वाह। हठात्-हठपूर्वक अचानक। माया-दया। फट-से-तत्काल। चौपट-बेकार।पार्क-बगीचा। आशय-मतलब। खातिर-के लिए। दीदीमा-नानी।फोटो कॉपी-नकल। आवाक्-हैरानी से चुप रह जाना। उत्कृष्ट-बहुत अच्छा। अभिधान-उपाधि, शब्दकोश।क्षमता-योग्यता। माथा-पच्ची-दिमाग पर जोर देना। व्यवस्था-प्रबंध। कांड-घटना।
दरकार-जरूरत। चेहरा खिल उठना-प्रसन्न होना। बाध्य-मजबूर। तीसरे पहर-दोपहर और शाम के बीच का समय। चारा-रास्ता। रव्याल-ध्यान।
बंधु -मित्र। तातुश-पिता के समान। जबान-आवाज।
डस्टिग-झाड़-पोंछ करना। मन मसोसना-मन की बात मन में रखना। आहिस्ता-धीमे से। विश्वास-यकीन। आमार मेये बेला-पुस्तक का नाम। तसलीमा नसरिन-बांग्लादेश की प्रसिद्ध लेखिका।
पेज-पृष्ठ। दिक्कत-कठिनाई। टेबिल-मेज। ड्रार-मेज के अंदर वस्तु रखने की बनी जगह। ऊँह-टालने का भाव।
शब्दार्थ
चैन-आराम। बेमतलब-बिना अर्थ की। बाँदी-दासी। नागा करना-अंतराल या छुट्टी करना। हाट-स्थानीय बाजार। पाड़ा-मोहल्ला।
चेष्टा-प्रयास। ताने मारना-व्यंग्यात्मक बातें। फर्क-अंतर। शरम-लज्जा। सिर पकड़कर बैठना-अत्यधिक परेशान होना। सहेजकर-सँभालकर। मोह-प्रेम।लगाव-प्यार। बुलडोजर-तोड़-फोड़ करने वाली मशीन। राजी-सहमत।नाश्ता-सुबह का हल्का भोजन। तबीयत-सेहत।मास-महीना। वयस-उम्र। सिर्फ-केवल।गैरकानूनी-कानून के विरुद्ध। खटना-काम में लगातार लगे रहना। भाग-दौड़-ज्यादा काम करना।उत्साह-जोश। दोष-भूल। हुनर-कला। स्नेह-प्रेम। महीना-मासिक वेतन।
जेठू -पिता के बड़े भाई। मरजी-इच्छा। स्मरणीय-याद आने योग्य। असाधारण-जो सामान्य न हो। दुर्दशा-बुरी हालत। आर्थिक-धन संबंधी।खाते-कमाते-मेहनत के साथ निर्वाह करना। रुद्ध-रुका हुआ। दादा-बड़ा भाई। भर्ती-दाखिल। बऊदी-भाभी। भाड़ा-किराया। ख्याल-ध्यान। अंतिम-आखिरी। भेंट-मुलाकात। क्रिया-कर्म-मृत्यु के बाद तौर-तरीके।दी-दीदी। बहलना-बदलना। राय-विचार, मत। मल्लेश्वरी-भारोत्तोलना की प्रसिद्ध महिला खिलाड़ी। अंत-समाप्त। अभिज्ञता-ज्ञान। बांधवी-सहेली। आहलादित-आनंदित। आयना-दर्पण। खुसर-फुसर-कानाफूसी करना। तुच्छ-छोटी।मगन-मस्त। भटकना-बेकार में इधर-उधर घूमना। उकताना-परेशान होना। हिलोरें मारना-अत्यधिक प्रसन्न होना।
मूल्यांकन प्रश्न
1. पाठ के किन अंशों से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है। क्या वर्तमान समय में स्त्रियों की इस सामाजिक स्थिति में कोई परिवर्तन आया है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।�2. अपने परिवार से लेकर तातुश के घर तक के सफ़र में बेबी के सामने रिश्तों की कौन- सी सच्चाई उजागर होती है?�3. इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता है। घरेलू नौकरों को और । किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है? इस पर विचार करिए।�4. ‘आलो-आँधारि’ रचना बेबी की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक मददों को समेटे है। किन्हीं दो मुख्य समस्याओं पर अपने विचार प्रकट कीजिए।� 5. तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो-जेदू का यह कथन रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है?�6. बेबी की जिंदगी में तातुश का परिवार न आया होता तो उसका जीवन कैसा होता? कल्पना करें और लिखें।�7. बेबी के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
8. लेखिका को लेखन के लिए किन-किन लोगों ने उत्साहित किया?