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JEEVAK AYURVEDIC MEDICAL COLLEGE �Kamlapur Akauni, Chandauli, UP

Subject: Rachna Sharir

Topic: SHROTAS WITH RESPECT TO MEDVAH SHROTAS

GUIDED BY:

Dr. Amit Kumar Singh (HOD)

Associate Professor

Dr. Varsha Gupta

Assistant professor

Department of Rachana Sharir

Presented by:

Sharat Chandra Basu

Roll No. 28

BAMS 1st prof

Batch 2023-24

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INDEX

व्याख्या

पर्याय

श्रोतस की उत्पत्ति एवं भौतिक संगठन

संख्या

श्रोतासों के प्रकार एवं मूल

चरक और सुश्रुत का तुलनात्मक अध्ययन

श्रोतसो के सामान्य कार्य

मेदवह श्रोतस

मेदवह श्रोतsदुष्टि के विशेष हेतु

मेदवह श्रोतदुष्टि के विशेष लक्षण

मेदवह श्रोत के विद्ध होने से लक्षण

मेदवह श्रोतस के कार्य

मेदोवह स्त्रोतस से संबंधित कुछ व्याधीयां

Research Article

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व्याख्या

निरुक्ति : स्रवणात श्रोतान्सि।

शरीर के वे भाग जहां स्रवण क्रिया होती हैं, वे स्रोतस हैं।

जिससे स्राव निकलता हो, वही श्रोतस हैं ।

पर्याय

श्रोतान्सि, सिरा, धमनीय, रसवाहिनी, स्थानानि, मार्गा, आशया

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स्वरूप, श्रोतस की उत्पत्ति एवं भौतिक संगठन

  • स्वरूप
  • स्वधातुसमवर्णानि वृतस्थूलान्यणुनि च ।
  • श्रोतान्सि दीर्घाणयाकृत्य पर्यटन सद्शानि ॥
  • ( च. वि. 5/25)
  • जिस धातु के जो श्रोत होते हैं वे उस धातु के समान वर्ण वाले गोल मोटे सूक्ष्म और आकृति में लंबी लता के समान होते हैं।
  • श्रोतस की उत्पत्ति एवं भौतिक संगठन
  • श्रोतस की उत्पाती में आकाश महाभूत प्रमुख हैं। सृष्टि की उत्पाती में कारण महाभूत होने वाले एकाधिक भौतिक सिद्धांत के अनुसार श्रोत या विविक्त अवयव पाँच महाभूतों से बने हैं और उनके उत्पत्ति के समय आकाश महाभूत का आधिक्य होता हैं ।

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संख्या

  • आचार्य चरक के अनुसार
  • संख्या : 13
  • आचार्य सुश्रुत के अनुसार
  • संख्या: 11 जोड़ी (22 )
  • आचार्य वाग्भट्ट के अनुसार
  • संख्या: 2 (दृश्य और अदृश्य)

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चरक और सुश्रुत का तुलनात्मक अध्ययन

क्र. सं.

श्रोतस का नाम

श्रोतस मूल(चरक )

श्रोतस मूल (सुश्रुत )

1

प्राणवह श्रोतस

हृदय और महाश्रोतस

हृदय और रसवाहिनी धमनीयां

2

उदकवह श्रोतस

तालु क्लोम

तालु क्लोम

3

अन्नवह श्रोतस

आमाशय एवं वाम पार्शव

आमाशय एवं अन्नवहिनी धमनियाँ

4

रसवह श्रोतस

हृदय और दसधमनीय

हृदय और रसवाहिनी धमनीयां

5

रक्तवह श्रोतस

यकृत और प्लिहा

यकृत, प्लिहा और रक्तवाहिनी धमनीयां

6

मांस श्रोतस

स्नायु और त्वक

स्नायु, त्वक और रक्तवाहिनी धमनीयां

7

मेदवह श्रोतस

दो वृक्क और वपावहन

कटि और दो वृक्क

8

अस्थिवह श्रोतस

मेद और जघन

-

9

मज्जावह श्रोतस

अस्थि और संधिया

-

10

शुक्रवह श्रोतस

दो वृषण और शेफ

दो स्तन और दो वृषण

11

मूत्रवह श्रोतस

वस्ती और वंक्षण

वस्ती और मेढ्र्

12

पुरीषवह श्रोतस

पक्वाशय और स्थूलगुदा

पक्वाशय और गुदा

13

स्वेदवह श्रोतस

आर्तववह श्रोतस

मेद और लोमकूप

-

-

गर्भाशय और आर्तववही धमनियाँ

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श्रोतसो के सामान्य कार्य

  • शरीर के सभी भावों की उत्पत्ति श्रोतो के द्वारा होती हैं।
  • श्रोतस परिणाम प्राप्त धातुओ को एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन

करते हैं।

  • शरीरस्थ भावों का पोषण करते हैं जिससे वे क्षीण नहीं होतें हैं।
  • श्रोतस के प्रकृतिस्थ: रहने से शरीर स्वस्थ रहता हैं।
  • मलों का वहन कर उन्हे शरीर से बाहर निकालते हैं।
  • श्रोतस विषयों अर्थात संज्ञाओ के वेगों का वहन कर शरीर को अनुग्रहित

करते हैं।

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मेदवह श्रोतस

  • मेदोवहानाम् श्रोतसाम् वृक्कौ मूलं वपावहनं च
  • (च. वि. 5/7)
    • मेदवह श्रोतो का मूल वृक्क और वपावहन हैं।
  • मेदोंवहे द्वे, तयोमुलं कटि वृक्कौ च
  • (सु.शा. 9/11)
    • मेदवह श्रोत दो हैं उनके मूल कटि और वृक्क हैं ।

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मेदवह श्रोतदुष्टि के विशेष हेतु

  • व्यायाम ना करने से
  • दिन में सोने से
  • वसा वाले मांस को अधिक सेवन से
  • अधिक मदिरा पीने से

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मेदवह श्रोतदुष्टि के विशेष लक्षण

  • मुख की मधुरता से,
  • हाथ पैरों में शून्यता,
  • दाह, मुख–तालु एवं कंठ का सुखना,
  • शरीर में मलो की अधिकता,
  • शरीर पर और मूत्र में मक्खीयों और चिटियों का बैठना,
  • शरीर में मछलियों की तरह गंध का आना,
  • निद्रा और तंद्रा का आना

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मेदवह श्रोत विद्ध होने के लक्षण

  • स्वेद,
  • अंगों की स्निग्धता,
  • तालुशोष
  • स्थूलता
  • सूजन
  • प्यास

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मेदवह श्रोतस के कार्य

  • शरीर में स्निग्धता लाना

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मेदवह श्रोतस से संबंधित कुछ व्याधीयां :-

  • प्रमेह
  • प्रमेह पिड़िका
  • स्थौल्य आदि।

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Research Article

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Reference

  • 1. Kumawat, M. (2022). BASICS OF MEDOVAHA SROTAS. WORLD JOURNAL OF PHARMACEUTICAL AND MEDICAL RESEARCH8(11), 115-117. https://www.wjpmr.com/download/article/102102022/1667205559.pdf
  • 2. Sharma, V. T. (2023). Rachana Sharir (2nd ed.). Jaypee Brothers medical Publishers.3.
  • 3. Singh, M. (2017). Rachna Shaarir Vigyan. Chaukhmbha orientalia.