सुस्वागतम
डॉ. अशोक बाचुळकर
प्रोफेसर एवं अध्यक्ष
हिंदी विभाग
आजरा महाविद्यालय, आजरा।
जन्म : 7 नवंबर, 1936
ग्राम - जोलखेडा, जिला - बैतूल
(मध्य प्रदेश)
साहित्य अकादेमी द्वारा सम्मानित
– 2012 कुसुमाग्रज पुरस्कार।
रचनाएँ : हड्डियों में छिपा ज्वर, दीवारों पर खून से, लकड़बग्गा हँस रहा है,
रोशनी के मैदान की तरफ, भूखंड ताप रहा है, आग हर चीज में बताई गई है।
औरत | चंद्रकांत देवताले
वह औरत�आकाश और पृथ्वी के बीच�कब से कपड़े पछीट रही है,
पछीट रही है शताब्दियों से�धूप के तार पर सुखा रही है�वह औरत आकाश और धूप और हवा से�वंचित घुप्प गुफा में�कितना आटा गूँध रही है?�गूँध रही है मनों सेर आटा�असंख्य रोटियाँ�सूरज की पीठ पर पका रही है
एक औरत�दिशाओं के सूप में खेतों को�फटक रही है�वक्त की नदी में�दोपहर के पत्थर से�शताब्दियाँ हो गईं�एड़ी घिस रही है,�एक औरत अनंत पृथ्वी को�अपने स्तनों में समेटे�दूध के झरने बहा रही है
एक औरत अपने सिर पर�घास का गट्ठर रखे�कब से धरती को�नापती ही जा रही है
धन्यवाद