प्रस्तुतकर्ता सतीश कुमार स्नातकोत्तर शिक्षक (हिंदी) जवाहर नवोदय विद्यालय, मौली,पंचकुला (हरियाणा) |
जवाहर नवोदय विद्यालय, मौली, �पंचकुला (हरियाणा) |
जामुन का पेड़ �
कृश्नचंदर
पाठ का मूल प्रतिपाद्य
पाठ प्रवेश
भाग एक : आँधी में जामुन के पेड़ का गिरना और उसके नीचे आदमी का दब जाना
रात को बड़े ज़ोर का झक्कड़ चला | सेक्रेटेरियट के लॉन में जामुन का पेड़ गिर जाता है | सुबह माली ने देखा कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है | माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास गया | चपरासी दौड़ा - दौड़ा क्लर्क के पास गया | क्लर्क दौड़ा - दौड़ा सुपरिटेंडेंट के पास गया | सुपरिटेंडेंट दौड़ा-दौड़ा बाहर लॉन में आया| मिनटों में गिरे हुए पेड़ के नीचे दबे हुए आदमी के चारों ओर भीड़ इकट्ठी हो गई |
‘बेचारा! जामुन का पेड़ कितना फलदार था.’ एक क्लर्क बोला.
‘इसकी जामुन कितनी रसीली होती थीं.’ दूसरा क्लर्क बोला.
‘मैं फलों के मौसम में झोली भर के ले जाता था. मेरे बच्चे इस की जामुनें कितनी ख़ुशी से खाते थे.’ तीसरे क्लर्क ने रुआंसे होकर कहा |
‘मगर ये आदमी?’ माली ने दबे हुए आदमी की तरफ़ इशारा किया |
‘हां, यह आदमी!’ सुपरिटेंडेंट सोच में पड़ गया.
भाग दो :माली,चपरासी,क्लर्क एवं सुपरिटेंडेंट का वार्तालाप
भाग तीन : सुपरिटेंडेंट द्वारा फाइल को कृषि विभाग में भिजवाना
भाग चार : फाइल को उद्यान कृषि विभाग में भिजवाना
रात को माली ने दबे हुए आदमी को दाल-भात खिलाया | माली ने दबे हुए आदमी से कहा, ‘तुम्हारी फाइल चल रही है. उम्मीद है कि कल तक फ़ैसला हो जाएगा.’दबा हुआ आदमी कुछ न बोला.माली ने फिर कहा, ‘तुम्हारा यहां कोई वारिस हो तो मुझे उसका अता-पता बताओ. मैं उसे ख़बर देने की कोशिश करूंगा |‘मैं लावारिस हूं.’ दबे हुए आदमी ने बड़ी मुश्क़िल से कहा.तीसरे दिन हॉर्टीकल्चरल डिपार्टमेंट से जवाब आ गया |बड़ा कड़ा जवाब था |इस समय जब ‘ लगाओ’ स्कीम बड़े पैमाने पर चल रही हैं | इसे में हमारा जामुन जैसे एक फलदार पेड़ को काटने की इज़ाजत नहीं दे सकता.’
‘अब क्या किया जाए?’ एक मनचले ने कहा, ‘अगर दरख़्त काटा नहीं जा सकता तो इस आदमी को काटकर निकाल लिया जाए!’ आजकल प्लास्टिक सर्जरी कितनी उन्नति कर चुका है |
सर्जन ने दबे हुए आदमी को अच्छी तरह टटोलकर, उसका स्वास्थ्य देखकर ख़ून का दबाव, नाड़ी और फेफड़ों की जांचकर के रिपोर्ट भेज दी कि ऑपरेशन कामयाब भी हो जाएगा, मगर आदमी मर जाएगा.’
भाग पाँच – रात को माली द्वारा दबे हुए आदमी को दाल-भात खिलाना |
भाग छ – दबे हुए आदमी को साहित्य अकादमी का मेंबर चुना जाना |
दबा हुआ आदमी धीरे से आह भरकर बोला – माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन ख़ाक़ हो जाएंगे हम, तुमको ख़बर होने तक!’ माली ने से बोला, ‘क्या तुम शायर हो?’ दबे हुए आदमी ने आहिस्ते से सिर हिला दिया. जब यह पता चला कि दबा हुआ आदमी शायर है तो सेक्रेटेरियट की सब-कमेटी फाइल को कल्चरल डिपार्टमेंट में भेज दिया | अनेक विभागों से गुजरती हुई फाइल साहित्य अकादमी के सेक्रेटरी के पास पहुँची | सेक्रेटेरियट पहुंचा और दबे हुए आदमी से इंटरव्यू लेने लगा. ‘तुम कवि हो ?’ उसने पूछा| ‘जी हां.’ दबे हुए आदमी ने जवाब दिया | “किस नाम से सुशोभित हो ?” – “ओस” “ओस?” सेक्रेटरी ज़ोर से चीखा , “क्या तुम वहीं ‘ओस’ हो जिसका गद्य संग्रह ‘ओस के फूल’ अभी प्रकाशित हुआ है ?’ ‘क्या तुम हमारी अकादमी के मेंबर हो?’ सेक्रेटरी ने पूछा - ‘नहीं!’ दूसरे दिन सेक्रेटरी भागा-भागा शायर के पास आया और बोला, ‘मुबारक़ हो, मिठाई खिलाओ, हमारी सरकारी अकादमी ने तुम्हें अपनी समिति का मेंबर चुन लिया है | ‘मगर मुझे इस दरख़्त के नीचे से तो निकालो.’ दबे हुए आदमी ने कराहकर कहा. |
भाग सात – फाइल को फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट में भेजना और कवि की मृत्यु होना |
साहित्य अकादमी के सेक्रेटरी ने ‘फॉरेस्ट डिपार्टमेंट’ को ‘अर्जेंट’ ’लिख दिया है. शाम को माली ने आकर दबे हुए आदमी को बताया कि कल फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के आदमी आकर इस दरख़्त को काट देंगे और तुम्हारी जान बच जाएगी. दूसरे दिन जब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के आदमी आरी-कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे तो इनको यह पेड़ काटने से रोक दिया गया |इस पेड़ को दस साल पहले पिटोनिया राज्य के प्रधानमंत्री ने सेक्रेटेरियट के लॉन में लगाया था | अब यह पेड़ अगर काटा गया तो पिटोनिया सरकार से हमेशा संबंध सदा के लिए बिगड़ जाएँगे | ‘मगर एक आदमी की जान का सवाल है!’ एक क्लर्क ग़ुस्से से चिल्लाया. शाम पांच बजे ख़ुद सुपरिटेंडेंट शायर की फाइल ले कर उसके पास आया | ‘सुनते हो?’ आते ही ख़ुशी से फाइल हिलाते हुए चिल्लाया, प्रधानमंत्री ने पेड़ को काटने सारी ज़िम्मेदारी अपने सिर पर ले ली है. कल वह पेड़ काट दिया जाएगा और तुम इस संकट से छुटकारा हासिल कर लोगे | मगर कवि का हाथ ठंडा था, आंखों की पुतलियां निर्जीव और चींटियों की एक लंबी पांत उसके मुंह में जा रही थी........ उसके जीवन फाइल भी पूर्ण हो चुकी थी | |
जब यह पता चला कि
बोध प्रश्न - |
प्रश्न. 1.�पाठ का शीर्षक ‘जामुन का पेड़’ सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण दबे हुए आदमी की उपेक्षा करता है; इस कथन के पक्ष अथवा विपक्ष में तर्क दीजिए।�उत्तर:�यह पाठ एक हास्य-व्यंग्य कथा है। इसमें सरकारी कार्यालयों की त्रुटिपूर्ण कार्य-प्रणाली पर बल दिया गया है। उनकी लचर व्यवस्था पर करारी चोट की गई है जो कहीं-कहीं अतिशयोक्तिपूर्ण भी हो गई है। इस प्रकार के वर्णन में सारी कथा अंधड में गिरे पेड पर निर्भर करती है। पेड़ के नीचे दबा आदमी तो सभी विभागों और उच्चाधिकारियों के लिए महत्त्वहीन है। तभी पेड़ के कारण विदेशी संबंध बिगड़ने और आदमी को काटने की बात कही गई है। यदि इसे देखें तो शीर्षक भी आदमी को छोड़कर पेड़ के लिए ही ‘जामुन का पेड़’ रखा गया है जो अपने-आप में व्यंग्य का एक पुट लिए हुए है। प्रश्न. 2.�जामुन का पेड़ काटने से कौन-से देश से भारत के संबंध बिगड़ने की संभावना थी और क्यों?�उत्तर:�जामुन का पेड़ काटने पर पीटोनिया राज्य से हमारे संबंध सदा के लिए बिगड़ जाने की संभावना थी। कारण यह था कि इस पेड़ को दस साल पूर्व पीटोनिया राज्य के प्रधानमंत्री ने स्वयं सेक्रेटेरियेट के लॉन में अपने हाथों से लगाया था। अतः आदमी की जान का क्या? एक देश के साथ बने-बनाए संबंधों को बिगाड़ना अनुचित था। इसलिए पेड़ को काटने की बात वहीं रोक दी गई प्रश्न. 3.�‘जामुन का पेड़’ पाठ का व्यंग्य स्पष्ट करें।�उत्तर:�जामुन का पेड़’ पाठ में कार्यालयी तौर-तरीकों में पाए जाने वाले विस्तार की निरर्थकता और पदों की क्रम संख्या की हास्यास्पद दशा पर करारी चोट की गई है। मानवीय संवेदना की कितनी उपेक्षा की जाती है, इस बात पर व्यंग्य किया गया है। एक मामूली-सी बात के लिए सरकारी दफ्तरों में कई-कई दिन लग जाते हैं। आरोप-प्रत्यारोप, ज़िम्मेदारी से पलायन और काम के प्रति उदासीनता के चलते एक व्यक्ति की जान चली गई तब कहीं जाकर उसकी फ़ाइलों का काम ख़त्म हो पाया। यदि पहले ही निर्णय किया गया होता तो बेचारा दबा हुआ आदमी बच जाता, लेकिन सरकारी दफ्तरों की लचर नीति ने उसकी जान ले ली। हैं। |
प्रश्न. 1 �इस पाठ में आए किन्हीं दो करुणापूर्ण दृश्यों को अपने शब्दों में उल्लेख कीजिए।�उत्तर:�पूरे पाठ में माली एक ऐसा पात्र है जो मानवीय संवेदना के आधार पर दबे हुए आदमी के साथ सदैव बना रहता है। उसे निकालने के लिए सबसे निवेदन करता है। रात को उसके मुँह में दाल-चावल या खिचड़ी डालता है। जब वह दबे हुए आदमी के मुँह में भोजन डालता है तो पाठक के मन में करुणा का भाव आता है। दूसरा पाठ का अंतिम दृश्य जब प्रधानमंत्री ने स्वयं सारी ज़िम्मेदारी अपने सिर पर लेकर पेड़ काटने का हुक्म दिया। ‘फ़ाइल पूर्ण हो ‘गई’ के साथ यह दृश्य आया कि दबे हुए आदमी का जीवन पूरा हो गया। उसकी साँसें रुक गईं, शरीर ठंडा पड़ गया और मुँह में चींटियों की एक कतार जा रही थी। इसे देखकर पाठक का हृदय करुणा से भर उठता है। प्रश्न. 2.�सरकारी दफ्तरों में औपचारिकताओं की उलझन मनुष्य के जीवन से भी बड़ी है।’ सिद्ध कीजिए।�उत्तर:�पाठ के आधार पर यह कथन पूर्णतया सत्य है। एक सामान्य-सी घटना थी कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा है तो किसी भी तरह से निकाल देना चाहिए था। पेड़ सरकारी दफ्तर के लॉन में गिरा था, इसलिए यह घटना भी सरकारी हो गई। कुछ लोग मिलकर जब उसे उठाने ही वाले थे तो सुपरिंटेंडेंट ने आकर उन्हें रोक दिया और डिप्टी सेक्रेटरी, ज्वाइंट सेक्रेटरी, अंडर सेक्रेटरी, चीफ़ सेक्रेटरी, मिनिस्टर और न जाने कौन-कौन इस समस्या में कूद पड़े। अनेक विभागों में उसकी फ़ाइल चलने लगी। उद्यान विभाग, वन-विभाग, व्यापार एवं कृषि विभाग में समस्या ऐसी उलझ गई कि विदेश मंत्रालय भी बीच में आ गया। कल्चरल-विभाग, मेडिकल-विभाग के कारण और उलटी-सीधी बातें चलती रहीं, पर आदमी वहीं दबा रहा। जब तक फ़ाइल पूरी हो पाई मौत से संघर्ष कर रहे उस आदमी की जिंदगी ही पूरी हो गई। |
मूल्यांकन प्रश्न - |
प्रश्न. 1. �‘जामुन का पेड़’ पाठ में सबसे मूर्खतापूर्ण कौन-सा प्रसंग है?�उत्तर:�यूँ तो सारी प्रक्रिया ही व्यंग्य के साथ-साथ हास्यास्पद है, परंतु जिस समय एक मनचला आदमी यह सुझाव देता है कि पेड़ नहीं काटा जा सकता तो आदमी को काट लिया जाए। आधा-आधा शरीर दोनों तरफ से निकालकर प्लास्टिक सर्जरी करवा ली जाए। मेडिकल-विभाग को यह कार्य सौंप दिया जाता है और उन्होंने आकर दबे हुए आदमी के रक्तचाप, रक्त और धड़कन आदि की जाँच के बाद जो रिपोर्ट भेजी वह सर्वाधिक हास्यास्पद है। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि-‘इस आदमी की सर्जरी हो जाएगी और सफल भी रहेगी पर आदमी मर जाएगा।’ यही प्रसंग मूर्खता की चरम सीमा है। प्रश्न. 2. �पेड़ के बजाय आदमी को काटने की सलाह पर अपने विचार व्यक्त करें।�उत्तर:�सरकारी निष्क्रियता, संवेदनहीनता की यह पराकाष्ठा है। सरकार की नज़र में मानवीयता कुछ नहीं है। पेड़ को काटने की बजाय जिंदा मनुष्य को काट देना यह मूर्खतापूर्ण कार्य सरकार में ही हो सकते हैं। इससे पता चलता है कि अपनी बला टालने या अफसरों को खुश करने के लिए निरर्थक, मूर्खतापूर्ण सुझाव भी दिए जा सकते |
गृहकार्य प्रश्न - |
जवाहर नवोदय विद्यालय,मौली,
पंचकुला (हरियाणा )
हिन्दी शिक्षण
कक्षा ग्यारहवीं ,विषय – हिंदी
प्रकरण – जामुन का पेड़
प्रस्तुतकर्ता – सतीश कुमार
स्नातकोत्तर शिक्षक (हिंदी)
धन्यवाद