भगवान के डाकिये
लेखक – रामधारी सिंह दिनकर�जन्म – 13 सितम्बर 1908�मृत्यु – 24 अप्रैल 1974�स्थान – सिमरिया घाट � बेगूसराय जिला,� बिहार, भारत�
इस कविता के द्वारा कवि कहते हैं कि भगवान बादलो के द्वारा पेड़ – पौधों, पहाड़ो के लिए सन्देश भेजते हैं। बादलो द्वारा बरसाया जल उनके लिए सुखद सन्देश लाता है। कवि पूरे विश्व को एक मानते हैं क्योंकि प्रकृति ने दो देशो में फर्क नहीं समझा। वे कहते हैं एक देश से दूसरे देश को जाती सुगंध को कोई बाँध नहीं सकता है। इस कविता की भाषा तत्सम, तदभव शब्दों से युक्त सरल भाषा है।
कविता प्रवेश
कविता का सार
इस कविता में “दिनकर” जी बताते है की पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं जो एक विशाल देश का सन्देश लेकर दूसरे विशाल देश को जाते हैं। उनके लाये पत्र हम नहीं समझ पाते मगर पेड़-पौधे, जल और पहाड़ पढ़ लेते हैं। यहाँ कवि ने बादलों को हवा में और पक्षियों को पंखो पर तैरते दिखाया है। वे कहते है की एक देश की सुगन्धित हवा दूसरे देश पक्षियों के पंखों द्वारा पहुँचती है। इसी प्रकार बादलों के द्वारा एक देश का भाप दूसरे देश में वर्षा बनकर गिरता है।
कविता की व्याख्या
पक्षी और बादल, �ये भगवान के डाकिए हैं, �जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं।��हम तो समझ नहीं पाते हैं �मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ �पेड़, पौधे, पानी और पहाड बाँचते हैं।
शब्दार्थ
चिट्ठियाँ: ��पत्र�
�बाँचते: ��पढ़ना
डाकिए:
सन्देश देने वाला
प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठय पुस्तक “वसंत-3” में से संकलित “रामधारी सिंह दिनकर” द्वारा रचित कविता “भगवान के डाकिए” से ली गयी है। इस कविता में कवि पक्षियों और बादलों को भगवान का डाकिया मानते हैं।
व्याख्या
कवि कहते हैं कि आकाश में उड़ते पक्षी और बादल भगवान का सन्देश लेकर आये हुए उसके डाकिए हैं। जो एक देश से दूसरे देश को उड़ते रहते हैं। इन डाकियों का सन्देश हम समझ नहीं पाते। किन्तु जिसके लिए हैं वे समझ जाते हैं। भगवान् बादलों के द्वारा जो सन्देश भेजते हैं उन्हें पेड़-पौधे, पहाड़ और जल अच्छी तरह से पढ़ पाते हैं क्योंकि ये उनके लिए होते हैं।
हम तो केवल यह आँकत हैं कि एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है।�और वह सौरभ हवा में तैरते हुए पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।�और एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है।
1 केवल: सिर्फ 2 आँकत: अनुमान 3 सुगंध: खुशबू� �4 पाँखों: पँख 5 तिरता: तैरता 6 भाप: वाष्प
प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठय पुस्तक “वसंत-3” में से संकलित “रामधारी सिंह दिनकर” कृत रचित कविता “भगवान के डाकिए” से ली गयी है। इस काव्यांश में कवि पूरे विश्व को एक मानते हैं।
व्याख्या
कवि कहते हैं कि हम मनुष्य देश को उसकी सीमाओं से जानते हैं किन्तु प्रकृति किसी सीमा को नहीं जानती। वह अपना वरदान सबको देती है। सुगंध किसी बंधन को नहीं मानते हुए एक देश से दूसरे देश उड़ती जाती है। वही महक पक्षियों के पंखो पर बैठकर इधर से उधर उड़ती रहती है और एक देश से उठी भाप दूसरे देश में वर्षा बनकर बरसती रहती है।
THANKS!
प्र॰1 कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है? स्पष्ट कीजिए।�उत्तर – कवि ने पक्षी और बादल को भगवान् के डाकिए इसलिय माना है क्योंकि ये संदेशो को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुचाने में सहायता करते हैं। बादल शीतलता का सन्देश देते हैं और पक्षी अपने पंखो पर सुगन्धित वायु को लेकर एक देश से दूसरे देश जाते हैं।
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THANKS!
प्र॰2 पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिट्ठियों को कौन-कौन पढ़ पाते हैं? सोचकर लिखिए।
उत्तर – पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिटिठयॉँ पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ ही पढ़ पाते हैं, वही उनकी भाषा को समझ पाते हैं।
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प्र॰3 इन पंक्तियों का क्या भाव है-�क. पक्षी और बादल प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश एक देश से दूसरे देश को भेजते हैं।�ख. प्रकृति देश-देश में भेदभाव नहीं करती। एक देश से उठा बादल दूसरे देश में बरस जाता है।�
उत्तर –�क: पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं वे एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं।�ख: प्रकृति एक देश से दूसरे देश में भेद-भाव नहीं करती इसिलिए एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर बरसता है।
प्र॰4 पक्षी और बादल की चिट्ठियों में पेडे़-पौधे, पानी और पहाड़ क्या पढ़ पाते हैं?
उत्तर – हाँ, पढ़ पाते हैं। भगवान पूरे विश्व को एक मानकर अपना प्रेम सभी में बराबर बाँटते हैं। उनका ये प्रेम बादलों द्वारा पानी के रूप में धरती पर आता है। जो पढ़ पौधों में जीवन भरता है। इसे ही पेड़-पौधे पानी और पहाड़ पढ़ते हैं।
प्र॰5 “एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है’’- कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।��उत्तर – “एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है”, से कवि का भाव यही कि एक देश की धरती दूसरे देश को प्यार और सौहार्द भेजती है। यहाँ ‘सुगंध’ भाईचारे का प्रतीक है और ‘गंध’ प्यार का।
धन्यवाद