ज्ञान गोष्ठी  (प.पू. गुरु देवश्री कानजी स्वामी के १३१ वाँ जन्मदिन के अवसर पर)                                                                                                                                                                                                  
विषय : भगवान आत्मा, प्रश्न : १ से १६

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1. द्रव्य शुध्द हे, गुण भी शुध्ध हे तो इसकी द्ष्टि करने से कया शुध्ध होता हैं ? *
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2. द्रव्य की अनंत शक्तिओ का परिणमन कैसे होता है? *
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3. भगवान आत्माको ज्ञान मात्र कहने का प्रयोजन कया हे ? *
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4. समयसार गाथा ८ के अनुसार अज्ञानी जीव को पहले कया उपदेश देना चाहिए ? *
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5. जीव को सम्यग्दर्शन वाला कहना वह कैसा कथन है ? *
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6. राग और आतमा मे कया संबंध है ? *
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7. सम्यकदशँन का विषय कया हे ? *
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8. ज्ञान और आत्मा मे पहले कौन जानने मे आता है ? *
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9. आत्मा लक्ष्य हे, ज्ञान लक्षण हे, एसा भेद रहे तब तक कया नहीं होता ? *
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10. आत्मा में वतँमान मे सुख का अंश कयों नही आता ? *
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11. व्रतादि विकल्पों को कया कहते है ? *
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12. आत्मा वस्तु अव्यक्त हे तो कैसे जाने ? *
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13. जीव का प्रयोजन आनंद प्राप्त करने का हे, तो ज्ञान वह आत्मा कयों कहा ? *
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14. मै शुध्ध हूं - ईसका अथँ कया हे ? *
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15. अज्ञानी को सम्यग्दर्शन पाने का सही उपाय कया हे ? *
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