14-09-2018 NVS ONLINE EXAM - THE HINDI ACADEMY
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए – हँसी शरीर के स्वास्थ्य का संदेश देने वाली है। वह एक साथ ही शरीर और मन को प्रसन्न करती है। पाचन शक्ति बढ़ाती है, रक्त को चलाती है और अधिक पसीना लाती है। हँसी एक शक्तिशाली दवा है। एक डॉक्टर के अनुसार हँसी जीवन की मीठी दवा है। आनंद से बढ़कर बहुमूल्य वस्तु मनुष्य के पास और नहीं है। कारलाइल एक राजकुमार था। वह कहता है कि जो जी से हँसता है वह कभी बुरा नहीं होता। जी से हँसो, तुम्हें अच्छा लगेगा। अपने मित्र को हँसाओ, वह अधिक प्रसन्न होगा। शत्रु को हँसाओ, तुमसे कम घृणा करेगा। एक अनजान को हँसाओ, तुम पर भरोसा करेगा। उदास को हँसाओ, उसका दुःख घटेगा। एक बालक को हँसाओ, उसके स्वास्थ्य में वृद्धि होगी। वह प्रसन्न और प्यारा बालक बनेगा। कष्टों में और चिंताओं में एक सुंदर हँसी, बड़ी प्यारी वस्तु भगवान ने दी है। 1. ‘हँसी’ से विशेषण बनेगा :
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2. ‘उसके स्वास्थ्य में वृद्धि होगी।’ वाक्य में रेखांकित पद का कारक बताइए।
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प्रसन्न, उदास विशेषण शब्द हैं। इनकी भाववाचक संज्ञा हैः
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मनुष्य के पास सबसे अनमोल वस्तु है:
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हँसी क्या नहीं करती है?
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए – मेरे मकान के आगे चौराहे पर ढाबे के आगे फुटपाथ पर खाना खाने वाले लोग बैठते हैं – रिक्शेवाले, मजदूर, फेरीवाले, कबाड़ी वाले। आना-जाना लगा ही रहता है । लोग कहते हैं – “आपको बुरा नहीं लगता? लोग सड़क पर गंदगी फैला रहे हैं और आप इन्हें बरदाश्त कर रहे हैं? इनके कारण पूरे मोहल्ले की आबोहवा खराब हो रही है ।” मैं उनकी बातों को हल्के में ही लेता हूँ । मुझे पता है कि यहाँ जो लोग जुटते हैं वे गरीब लोग होते हैं ।अपने काम-धाम के बीच रोटी खाने चले आते हैं और खाकर चले जाते हैं । ये आमतौर पर बिहार से आए गरीब ईमानदार लोग हैं जो हमारे इस परिसर के स्थायी सदस्य हो गए हैं । ये उन अशिष्ट अमीरों से भिन्न हैं जो साधारण-सी बात पर भी हंगामा खड़ा कर देते हैं । लोगों के पास पैसा तो आ गया पर धनी होने का स्वर नहीं आया । अधजल गगरी छलकत जाए की तर्ज पर इनमें दिखावे की भावना उबल खाती है । असल में यह ढाबा हमें भी अपने माहौल से जोड़ता है । मैं लेखक हूँ तो क्या हुआ? गाँव के एक सामान्य घर से आया हुआ व्यक्ति हूँ । बचपन में गाँव-घरों की गरीबी देखी है और भोगी भी है । खेतों की मिट्टी में रमा हूँ, वह मुझमें रमी है । आज भी उस मिट्टी को झाड़झुड कर भले ही शहरी बनने की कोशिश करता हूँ, बन नहीं पाता । वह मिट्टी बाहर से चाहे न दिखाई दे, अपनी महक और रसमयता से वह मेरे भीतर बसी हुई है । इसीलिए मुझे मिट्टी से जुड़े ये तमाम लोग भाते हैं । इस दुनिया में कहा-सुनी होती है, हाथापाई भी हो जाती है लेकिन कोई किसी के प्रति गाँठ नहीं बाँधता । दुसरे-तीसरे ही दिन परस्पर हँसते-बतियाते और एक-दुसरे के दुःख-दर्द में शामिल होते दिखाई पड़ते हैं । ये सभी कभी-न-कभी एक-दूसरे से लड़ चुके हैं लेकिन कभी प्रतीत नहीं होती कि ये लड़ चुके हैं ।कल के गुस्से को अगले दिन धुल की तरह झाड़कर फेंक देते हैं। Question: “इस दुनिया में कहा-सुनी होती है” – ‘इस दुनिया’ का संकेत है :
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प्रस्तुत गद्यांश साहित्य की किस विधा के अंतर्गत आएगा?
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साधारण बात पर भी हंगामा कौन खड़ा कर देते हैं?
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लेखक लोगों की शिकायतों को हल्के में लेता है, क्योंकि :
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लोग लेखक से क्यों पूछते हैं कि क्या आपको बुरा नहीं लगता?
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विद्यार्थी जीवन को मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी कहें तो कोई अतिशयोक्त्ति नहीं होगी। विद्यार्थी काल मे बालक में जो संस्कार पड़ जाते हैं जीवन-भर वही संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है, वह आदर्श विद्यार्थी बनकर सभ्य नागरिक बन जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही तो सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। Question : ‘संसार को सौरभ’ देने का अर्थ है
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गद्यांश में आदर्श विद्यार्थी के किन गुणों की चर्चा की गई है?
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गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि
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गद्यांश में ‘वृक्ष’ किसे कहा गया है?
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मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी विद्यार्थी जीवन को क्यों माना जाता है?
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संधि-विच्छेद : जभी
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संधि-विच्छेद : काव्योर्मि
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गायक
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श्रावण
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आशीर्वाद
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मुहावरे : आग में घी डालना
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मुहावरे : मन को आगा-पीछा करना
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मुहावरे : अंधेर नगरी
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मुहावरे : अक्ल का दुष्मन
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मुहावरे : अपने पैर पर कुल्हाडी मारना
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अनेक शब्दों के लिए एक शब्द : जानने की इच्छा रखने वाला ।
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अनेक शब्दों के लिए एक शब्द : जो बहुत बात करता हो।
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अनेक शब्दों के लिए एक शब्द : जो किसी का हित चाहता हो।
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अनेक शब्दों के लिए एक शब्द : जो मार्ग में चलने वाला हो।
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अनेक शब्दों के लिए एक शब्द : जंगल में लगने वाली आग।
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