'एन.जे.पी.सी - ए मिलियन वॉइसेस'

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    दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर एक महिला की मौत हो जाती है - टेटनस से.. कारण माहवारी के समय इस्तेमाल किये ब्लाउज का हुक। तमाम पहाड़ी इलाक़ो में महिलाएँ यदि जानवरों के तबेले में सोती है तो लाखों महिलाएँ देश भर में रसोई में भी नहीं जा सकती, छोटे बच्चों को छू नहीं सकती और वही दुनिया के किसी और हिस्से में एक बच्ची को स्कूल छोड़ना पड़ता है क्यूँकि ना तो उसके पास माहवारी के दौरान इस्तेमाल करने के लिए कपड़े का टुकड़ा है और ना एक टॉयलेट जहाँ वो बदल सके। विश्व के तमाम हिस्सों में लाखों महिलाएँ आज भी रेत, राख, सूखी पत्तियाँ और यहाँ तक की पॉलीथीन इस्तेमाल कर रही हैं। माहवारी / मासिक धर्म की प्राकृतिक क्रिया में बुनियादी सुविधाओं के न होने के कारण अक्सर उन्हें इन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । लगभग एक दशक पहले गूँज ने इस मुद्दे को खोलने की पहल की और एक उपाय के रूप में 'नॉट जस्ट ए पीस ऑफ क्लॉथ' के तहत कपड़े से बने सैनेटरी पैड (माय पैड) को बनाना शुरू किया। 'एन.जे.पी.सी - ए मिलियन वॉइसेस' के माध्यम से हम दुनिया भर में मासिक धर्म के मुद्दे और समस्याओं के बारे में आवाज़ उठाना चाहते हैं और इसे सामाजिक धारा से जोड़ना चाहते हैं । हमारा मानना है कि जब लाखों लोग इस मुद्दे पर बात करेंगे तो यह दबा छिपा विषय हमारे सामान्य जीवन का हिस्सा बनेगा । अगले कुछ महीनों में आप इससे जुड़े बहुत से तथ्य जानेंगे, जैसे की हमने जाना की तमाम नेत्रहीन लड़कियाँ अक्सर जान ही नहीं पाती की उनका मासिक धर्म शुरू हो चुका है। नीचे दिए इस फॉर्म को भरें... तथा प्रिंट आउट लें और लोगो के बीच चर्चा करें...यह हमारा एक छोटा सा प्रयास है लोगों तक पहुचने का.. धर्म, जाति, देश, परदेश, अमीर - गरीब की सीमाओं से दूर.. यह फॉर्म साधारण सर्वेक्षण फॉर्म नहीं है। हम चाहते हैं आप इसे मन से पढ़ें और दिल से जवाब दें । हम इस विषय पर आपके विचार और अनुभव जानना चाहते हैं। अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों से इस विषय पर चर्चा करे और इस अभियान के साथ एक और आवाज़ जोड़े। यही समय है - समझने का कि यह केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं, मानवता का मुद्दा है। विश्वास सहित, अंशु गुप्ता संस्थापक – गूँज
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