परात्मनिन्दाप्रशंसे सदसद्-गुणोच्छादनोद्भावने च ______ गोत्रस्य। सूत्र पूर्ण करो-
उच्छादन का क्या अर्थ होता है?
नीच गोत्र के आस्रव का कारण क्या है?
तद्विपर्ययो _____र्वृत्यनुत्सेकौ चोत्तरस्य। सूत्र पूर्ण करो-
उच्च गोत्र के आस्रव का कारण क्या है?
निचैर्वृत्ति का क्या अर्थ है?
नम्र वृत्ति को अनुत्सेक कहते हैं?
कौन से भाव उच्च गोत्र के आस्रव के कारण हैं?
अंतराय कितने होते हैं?
कोई व्रती बनना चाहता है।हम उस समय पर अंतराय डालें तो ये कौन सी अंतराय है?
कोई सम्यग्ज्ञान अर्जित करना चाहता है उसके उत्साह में कमी डालना । ये कौन सी अंतराय है?
संसारी जीव के कितने कर्मों का बन्ध प्रति समय चलता रहता है?
निम्न में से संसारी जीव के कौन से कर्म का बन्ध प्रति समय चलता रहता है?
बंध कितने प्रकार के होते हैं?
Does this form look suspicious? Report