एशिया-प्रशांत के विद्यालयों में जीवित विरासत के साथ शिक्षण और सीखने के विषय पर विद्यालयों का सर्वेक्षण
जीवित विरासत में सांस्कृतिक प्रथाए और ज्ञान शामिल हैं जो समुदायों के लिए सार्थक हैं और वे उनकी पहचान का एक हिस्सा है, जिसे वे भविष्य की पीढ़ियों तक संचारित करना जारी रखना चाहते हैं। संगीत और नृत्य, त्योहार और अनुष्ठान, हस्तशिल्प या कृषि ज्ञान – ये सभी जीवित विरासत के कई रूप हैं। जीवित विरासत हमारे चारों ओर है।

एशिया और प्रशांत क्षेत्र में, कई विद्यालय और शिक्षक अपने शिक्षण को छात्रों की वास्तविकता से जुड़े रहने के लिए शिक्षण को जीवित विरासत से जोड़ते हैं। विद्यालयों में जीवित विरासत का उपयोग करने के कई तरीके हैं। जीवित विरासत को एक विषय के रूप में पढ़ाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, छात्र पारंपरिक संगीत, स्थानीय नृत्य या कढ़ाई सीख सकते हैं। इसका उपयोग सीखने की प्रक्रिया में मदद करने के लिए भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, छात्र ज्योमेट्री का अभ्यास करने के लिए स्थानीय बुनाई का अध्ययन कर सकते हैं या अपने स्थानीय वातावरण का अध्ययन करके विज्ञान सीख सकते हैं। इसका उपयोग पाठ्येतर गतिविधियों के हिस्से में, परियोजनाओं में या कई अन्य रचनात्मक शिष्टाचार में किया जा सकता है।

यूनेस्को (UNESCO) यह समझने के लिए एक सर्वेक्षण कर रहा है कि एशिया और प्रशांत में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण और सीखने के लिए जीवित विरासत का उपयोग कैसे किया जा सकता है। यदि आप एक प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य या विद्यालय प्रबंधन टीम के सदस्य हैं, तो हम आपसे १५ अगस्त २०१९ से पहले सुनना चाहेंगे।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष हमें विद्यालयों में जीवित विरासत के साथ शिक्षण और सीखने को बढ़ावा देने में मदद करेंगे। वे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुदायों की जीवित विरासत की सुरक्षा का भी समर्थन करेंगे।

सर्वेक्षण को पूरा होने में लगभग १५ मिनट लगने चाहिए। कृपया आश्वस्त रहें कि आपकी प्रतिक्रियाएँ गोपनीय रहेंगी और उनका उपयोग केवल समेकित रूप में किया जाएगा। आपकी सहभागिता के लिए अग्रिम रूप से धन्यवाद।



यदि आपको कोई तकनीकी कठिनाई हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें: livingheritage.in.schools@gmail.com.
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