हम बनेंगे गीता-वित् प्रश्नोत्तरी - 4
गीता-वित् वह है जिसे भगवद् गीता का पूर्ण ज्ञान है।

🌷☘️जय श्री राम!!🌷☘️
🌷☘️जय श्री कृष्ण!!🌷☘️

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🌷ॐ श्री गणेशाय नम: 🌷
🌷ॐ श्री गुरुभ्यो नम: 🌷

इस नए प्रकार के प्रश्नोत्तरी में आपका स्वागत है !! 

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
भगवद् गीता
🌷ॐ श्री परमात्मने नम: 🌷
संजय
हमने पिछली प्रश्नोत्तरी में देखा कि भगवद् गीता में चार वक्ता हैं - धृतराष्ट्र, संजय, अर्जुन और श्री कृष्ण । 
भगवद् गीता में संजय के श्लोक - 41 श्लोक हैं।  
आइए आज संजय के बारे में जानें
संजय कौन थे?

संजय  राजा धृतराष्ट्र के सलाहकार और सारथी थे। संजय ऋषि वेद व्यास के शिष्य भी थे और धृतराष्ट्र को युद्ध की सभी घटनाओं को बताने के लिए ,
ऋषि व्यास ने उन्हें दिव्य दृष्टि दी थी। वे भगवान कृष्ण के भक्त थे और  अर्जुन की तरह उन्हें दिव्य ज्ञान और विश्वरूप दर्शन पाने का सौभाग्य मिला था ।

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वेद व्यास ने उन्हें दिव्य दृष्टि क्यों दी?

वेद व्यास पहले धृतराष्ट्र को दिव्य दृष्टि देने वाले थे,  लेकिन धृतराष्ट्र ने मना कर दिया क्योंकि वे अपने पुत्रों का वध होते नहीं देखना चाहते थे इसलिए व्यास जी ने  संजय को दिव्य दृष्टि दिया था।

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संजय को युद्ध का सजीव विवरणकार Live Commentator क्यों कहा जाता है?

1. जैसे ही संजय युद्ध के दृश्य देख रहा था, वैसे ही वह धृतराष्ट्र को बता रहा था। 

2. संजय का अर्थ है “विजय, ऐसा व्यक्ति जिसने अपने भीतर के आत्म पर विजय प्राप्त कर ली हो।” अपने नाम की तरह ही संजय ने भी युद्ध की दूरगामी घटनाओं  को बिना किसी पक्षपात के स्पष्टता और सटीकता के साथ धृतराष्ट्र को सुनाया था।  

3. उनका दिमाग इतना तेज़ था कि वे योद्धाओं के मन की बात को समझ सकते थे और सब कुछ सुन सकते थे। 

4. उन्हीं के कारण हम वास्तव में युद्ध के दृश्यों की कल्पना कर पाते हैं
- चाहे वह सेनाओं की व्यूह व्यवस्था हो , -चाहे वह शंखों की कोल्हापूर्वक शोर -चाहे  अर्जुन की दुविधा या  उसका धनुष-बाण फेंककर युद्ध से इनकार करना हो या 
- चाहे भगवान के विश्वरूप दर्शन हो - सब कुछ उन्होंने बहुत सुंदर तरह से बताया । 

5. ऐसा माना जाता है कि दुर्योधन की मृत्यु के बाद संजय ने दिव्य दृष्टि खो दी थी।
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