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Appeal to the Prime Minister to levy a 2% Emergency Coronatax on the Richest 1% to Finance the Necessary Measures to Combat the Corona Pandemic and its Multiple Public Health-related and Socio-Economic Impact
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An appeal the Prime Minister to levy a 2% Emergency Coronatax on the Richest 1% to Finance the Necessary Measures to Combat the Corona Pandemic and its Multiple Public Health-related and Socio-Economic Impact

“We, the people of India”, call upon the Prime Minister to increase the amount of relief package announced by the government to fight the Coronavirus pandemic and its wide-ranging socio-economic implications (including massive disemployment linked with starvation) from the current Rs 1.7 lakh crore to at least Rs. 10 lakh crore and take the measures suggested below.

The additional revenue required for this can be raised by his government by levying a mere 2% Emergency Corona Tax on the wealth of the richest 1% people of India. They are estimated to have a total wealth of about Rs. 476 lakh crore presently.

The demands in this Petition are based on the Constitution's Article 38(2), which mandates that the government must “minimise the inequalities in income”; and Article 39(c) which directs “[securing that] . . . the economic system does not result in the concentration of wealth . . .”

1. Stop police control of an unplanned lockdown, and move away from the emphasis on tertiary care, to support community based participation in tracking, testing, isolating, and strengthening primary health care for victims.

2. Ramp up Coronavirus testing several fold in order to identify all the Coronavirus victims, symptomatic or not, followed by quarantining and/or isolating them and making arrangements for supportive treatment if their health deteriorates.

3. Reinvigorate the Public Health System from villages and tribal hamlets upwards to towns/cities for fighting the Corona pandemic. Increase public expenditure on healthcare by at least 1.5% of GDP, i.e. about Rs. 3.4 lakh crore, apart from what is already being spent.

4. Take over control of all private hospitals, nursing homes and private testing labs in order to respond urgently and adequately to combat Covid-19.

5. Ensure distribution of all essential food items to enable the dis-employed workers, from both the organised and unorganised sectors, to lead a ‘life with dignity’ during the lockdown and thereafter as well, as mandated by Article 21 of the Constitution.

6. In addition, provide minimum monthly cash support of at least Rs. 4,000 per family to all workers’ households (roughly, 20 crore families) across the country, irrespective of whether they have ration cards and AADHAR cards or not.

7. Until the economy recovers and the people migrate back to the cities, the government would need to substantially increase the provision for employing people in MGNREGA in rural areas, apart from also launching a similar ‘urban employment guarantee scheme’ for at least the small towns, to begin with.

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कोरोनावायरस महामारी की वजह से पनपे बहु-आयामी जनस्वास्थ्य-संबंधी व सामाजिक-आर्थिक संकट से जूझने हेतु कोष जुटाने के लिए प्रधानमंत्री को सबसे दौलतमंद एक फ़ीसद पर 2% 'आपात्कालीन कोरोना कर' लगाने का नागरिक आह्वान

“हम, भारत के लोग”, प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि आपकी सरकार द्वारा कोरोनावायरस महामारी और इसके देशव्यापी सामाजिक-आर्थिक परिणामों (जिसमें लाखों मज़दूरों को भुखमरी व हताशा के कगार पर ढकेलने वाली चौतरफ़ा बेरोज़गारी भी शामिल है) से जूझने के लिए घोषित किये गए सरकारी राहत पैकेज को रु. 1.7 लाख करोड़ से कम-से-कम रु. 10 लाख करोड़ तक बढ़ाया जाए और निम्नांकित ठोस कदम तत्काल उठाए जाएं।

सरकार इसके लिए अतिरिक्त राजस्व देश के सबसे दौलतमंद 1% लोगों से मात्र '2% आपात्कालीन कोरोना कर' लगाकर जुटा सकती है। अनुमान है कि वर्तमान में इन महा-अमीरों के पास कुल रु. 476 लाख करोड़ की दौलत है।
देश के महा-अमीरों पर '2% आपात्कालीन कोरोना कर' के उपरोक्त प्रस्ताव के निर्देश संविधान के अनुच्छेद 38(2) - "आमदनी की गैर-बराबरियों को न्यूनतम किया जाए"; और अनुच्छेद 39(ग) - "[सुनिश्चित किया जाए] . . . अर्थव्यवस्था ऐसी न हो कि दौलत का संकेद्रण हो . . ." में दिए गए हैं।

1. योजना-विहीन तालाबंदी (लॉकडाउन) पर पुलिस नियंत्रण हटाया जाए और अतिउच्च-स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर से वर्तमान फ़ोकस के बजाए जन-सहभागिता की सहारे महामारी के मरीज़ों को खोजना-पहचानना, परीक्षण (टेस्टिंग) करना, अलग-थलग करना (आइसोलेशन) और प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख की सुविधाओं को पुख़्ता किया जाए।

2. कोरोनावायरस परीक्षण (टेस्टिंग) का दायरा कई गुना बढ़ाना होगा ताकि करोनावायरस-पीड़ितों को पहचाना जा सके, चाहे लक्षण दिखें या ना दिखें, फिर उन्हें कोरंटाइन में रखने या अलग-थलग करने (आइसोलेशन) और, अगर उनकी तबियत में गिरावट आ रही हो तो, उनके ज़रूरी इलाज का इंतज़ाम करना होगा।

3. कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए आज बदहाल 'सार्वजनिक जनस्वास्थ्य व्यवस्था' को गावों और आदिवासी टोलों से लेकर ऊपर कस्बों/महानगरों तक पुनर्जीवित करना लाज़िमि है। वर्तमान में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर किए जा रहे खर्च के अलावा सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर कम-से-कम सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीडीपी) का 1.5% अतिरिक्त खर्च, यानी लगभग रु. 3.4 लाख करोड़, करना ही होगा।

4. सरकार, सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और निजी परीक्षण प्रयोगशालाओं – डॉक्टरों व पूरे स्टाफ़ समेत – को तत्काल अपने नियंत्रण में कर ले ताकि वह पूरी क्षमता वह तेजी के साथ कोविड-19 महामारी से जूझ सके।

5. संगठित व असंगठित क्षेत्रों दोनों के बेरोज़गार कर दिए गए सभी मज़दूरों तक जीने के लिए सभी तरह की ज़रूरी खाद्य सामग्री बगैर किसी देरी के पहुचाई जाएं (खाद्य सुरक्षा) ताकि वे तालाबंदी के दौरान व बाद में भी 'सम्मानजनक जीवन’ जी सकें, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में मौलिक हक के रूप में निहित है।

6. इसके अलावा, देशभर के सभी मेहनतकशों के परिवारों (लगभग 20 करोड़ परिवार) को कम-से-कम रु. 4000/माह नगद की राहत दी जाए, चाहे इनके पास राशन कार्ड या आधार कार्ड हों या ना हों। अगर खाद्य सुरक्षा और नगद राहत का प्रावधान दो माह तक भी किया जाएगा तो इसका खर्च रु. 2.4 लाख करोड़ आएगा।

7. जब तक अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर नहीं आती और मज़दूर शहरों में नही लौटते, तब तक सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोज़गार देने के लिए 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी अधिनियम' ('मनरेगा') के तहत रोज़गार का प्रावधान काफ़ी बढ़ाना पड़ेगा। साथ में, सरकार को शुरूआती चरण में कम-से-कम छोटे शहरों/कस्बो में भी 'मनरेगा' की तर्ज़ पर 'शहरी रोज़गार गारंटी स्कीम' लागू करनी होगी। 'जीने लायक मज़दूरी' के साथ रोज़गार का प्रावधान करना संविधान के अनुच्छेद 39(क), 41 व 43 के मुताबिक सरकार की संवैधानिक जवाबदेही है।

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